Category: साहित्य

होली के हुड़दंग : लोक साहित्य का संग

– डा॰ रामरक्षा मिश्र विमल होली, होरी भा फगुआ जवन कहीं, हटे एकही. साँच पूछीं त हम एह अवसर पर रंग खेलला आ हुड़दंगई के पक्षपाती हईं. जइसे बियाह शादी का अवसर पर मेहरारुन के गारी गावल हमरा बिल्कुल वैज्ञानिक लागेला, ओसहीं फगुआ के...

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आपन भारत के हाल

– कमल जी मिश्रा अइसन फाटल खेत में लामे लाम दरार जइसे बोले मंच पे नेता दात चियार. बुढवा पीपर गाव के तब कहले घिघिआइ गदहा रसगुला भछे गलफर गइल छिलाइ. चढ़ल शनीचर माथ पे फुटहा भइल मोहाल शासन-भइसा चर गइल आजादी के माल. जरे पलानी...

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धरती के चुनरी रंगाई

– ओमप्रकाश अमृतांशु कि आरे झुरू -झुरू बहेला फगुनवा , सगुनवा लेइके बा आईल. लाल -पियर शोभेल गगनवा , धरती के चुनरी रंगाईल. {1} आमवा से अमरित टपके , चह-चह चहके चिरइयाँ. महुआ सुगंध में मातल, कुकू -कुकू कुकेले कोइलिया . कि आरे...

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