देवी गीत
– ओमप्रकाश अमृतांशु रुनु-झुनू, झुनू-झुनू झुनके पैजनिया. खनके कंगना . मोरी देवी अइली डुमरी के फुल हो, झुलुअवा लगावऽ अंगनवा ना. शुभ नवरात शुभे-शुभे घरी आइल, चंपा-चमेली फुल केदली फुलाइल, दवाना-मडुआव़ा के संघे खिलखिलाइल ओढउलवा...
Read More“डोलिए में अइनीं, डोलिए में गइनीं, डोलिए में रहि गइल पेट. ए सासु जी तोहरे किरिया सईंया से नाहीं भेंट.” एक जमाना रहुवे छायावादी कवियन के. बात के घुमा के अइसे कहीहें कि कुछ लोग बूझी कुछ ना. कविता के खजुराहो जस होला...
Read More– राज गुप्तसुन्दर सिंह सीतापुर के राजा रहले. सीतापुर राज के एगो रसम-रिवाज रहल कि हर दशहरा पर...
Read MorePosted by Editor | Mar 30, 2013 | पुस्तक चर्चा, सरोकार |
भोजपुरी पंचायत पत्रिका के अप्रेल अंक प्रकाशित हो गइल बा. एह अंक में चौतरफा फाँस में फसल शीला...
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