Category: साहित्य

देवी गीत

– ओमप्रकाश अमृतांशु रुनु-झुनू, झुनू-झुनू झुनके पैजनिया. खनके कंगना . मोरी देवी अइली डुमरी के फुल हो, झुलुअवा लगावऽ अंगनवा ना. शुभ नवरात शुभे-शुभे घरी आइल, चंपा-चमेली फुल केदली फुलाइल, दवाना-मडुआव़ा के संघे खिलखिलाइल ओढउलवा...

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महतारी

– केशव मोहन पाण्डेय जोन्हिया काकी पता ना केतना दिन के भइली कि टोला भर के सभे काकीए कहेला. ऊ अपना टूटही पलानी में अकेले अपना बाकी जिनगी से ताल ठोंकेली. उनकर पूत पुरन नवका दुनिया के निकललन. दू-तीन बार पंजाब कमाए गइल रहलन से...

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बतकुच्चन – १०४

“डोलिए में अइनीं, डोलिए में गइनीं, डोलिए में रहि गइल पेट. ए सासु जी तोहरे किरिया सईंया से नाहीं भेंट.” एक जमाना रहुवे छायावादी कवियन के. बात के घुमा के अइसे कहीहें कि कुछ लोग बूझी कुछ ना. कविता के खजुराहो जस होला...

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