महतारी
– केशव मोहन पाण्डेय जोन्हिया काकी पता ना केतना दिन के भइली कि टोला भर के सभे काकीए कहेला. ऊ अपना टूटही पलानी में अकेले अपना बाकी जिनगी से ताल ठोंकेली. उनकर पूत पुरन नवका दुनिया के निकललन. दू-तीन बार पंजाब कमाए गइल रहलन से...
Read More“डोलिए में अइनीं, डोलिए में गइनीं, डोलिए में रहि गइल पेट. ए सासु जी तोहरे किरिया सईंया से नाहीं भेंट.” एक जमाना रहुवे छायावादी कवियन के. बात के घुमा के अइसे कहीहें कि कुछ लोग बूझी कुछ ना. कविता के खजुराहो जस होला...
Read More– राज गुप्तसुन्दर सिंह सीतापुर के राजा रहले. सीतापुर राज के एगो रसम-रिवाज रहल कि हर दशहरा पर...
Read MorePosted by Editor | मार्च 30, 2013 | पुस्तक चर्चा, सरोकार |
भोजपुरी पंचायत पत्रिका के अप्रेल अंक प्रकाशित हो गइल बा. एह अंक में चौतरफा फाँस में फसल शीला...
Read More– डा॰ रामरक्षा मिश्र विमल होली, होरी भा फगुआ जवन कहीं, हटे एकही. साँच पूछीं त हम एह अवसर पर रंग खेलला आ हुड़दंगई के पक्षपाती हईं. जइसे बियाह शादी का अवसर पर मेहरारुन के गारी गावल हमरा बिल्कुल वैज्ञानिक लागेला, ओसहीं फगुआ के...
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