Category: साहित्य

बुरा जो देखन मैं चला मुझ से बुरा न कोय!

भोजपुरी पंचायत के जुलाई २०१३ के अंक सामने बा आ ओकरा के पढ़त घरी प्रभाकर पाण्डेय के लिखल व्यंग्य रचना के एगो लाइन पर आँख अटक के रहि गइल कि “बुरा जो देखन मैं चला, मुझसे बुरा ना कोय”. फेर याद आ गइल कहीं पढ़ल एगो चरचा. ओह...

Read More

हमके हीन मत समझीं

– डॉ॰ आशारानी लाल हम अपना बारे में रउवा सभे से कुछ बतावल चाहत रहीं. कुछे नाहीं, बहुत कुछ बतइतीं, चाहें भर जिनगी के कहनी कहतीं, बाकी का कहीं – अपन नउँवें बतावत के नऽ हमरा लाज घेर लेले बा. सोचतानी कि हमार नउँवा सुनिये...

Read More

मनोज भावुक के एकल कथा पाठ

मनोज भावुक के कहानीकार का रूप में बहुत कमे लोग जानेला. अधिका लोग उनका के कवि आ फिल्म समीक्षके का रूप में जानेला. पिछला दिने मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली तीन दिन के एगो साहित्यिक पर्व के आयोजन नई दिल्ली के मंडी हाउस का त्रिवेणी...

Read More

प्रेम के लहर

– केशव मोहन पाण्डेय जमाना बदलऽता, एकर लछन शहर से दूर गाँवो-देहात में लउकऽता. अब ठेंपों छाप लोग के बात-व्यवहार में जमाना के नवका रूप झलकेला. सुन्नर बाबा ढेर पढ़ले ना रहले, बाकीर ऊ करीकी अक्षर के भँइस ना समुझस. पतरा-पोथी के...

Read More

बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिए पर रही (बतकुच्चन – ११०)

बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिए पर रही. आजु जब बतकुच्चन करे बइठल बानी त सामने टीवी पर अइसने कुछ बहस चलत बा. पंच त पंच महापंच के बात अनठिया देबे पर लागल बा सभे. आ हमहु एह पर बेसी कुछ ना कहब काहे कि कहल गइल बा कि जर जोरू जमीन...

Read More

Recent Posts