Category: साहित्य

हमके हीन मत समझीं

– डॉ॰ आशारानी लाल हम अपना बारे में रउवा सभे से कुछ बतावल चाहत रहीं. कुछे नाहीं, बहुत कुछ बतइतीं, चाहें भर जिनगी के कहनी कहतीं, बाकी का कहीं – अपन नउँवें बतावत के नऽ हमरा लाज घेर लेले बा. सोचतानी कि हमार नउँवा सुनिये...

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मनोज भावुक के एकल कथा पाठ

मनोज भावुक के कहानीकार का रूप में बहुत कमे लोग जानेला. अधिका लोग उनका के कवि आ फिल्म समीक्षके का रूप में जानेला. पिछला दिने मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली तीन दिन के एगो साहित्यिक पर्व के आयोजन नई दिल्ली के मंडी हाउस का त्रिवेणी...

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प्रेम के लहर

– केशव मोहन पाण्डेय जमाना बदलऽता, एकर लछन शहर से दूर गाँवो-देहात में लउकऽता. अब ठेंपों छाप लोग के बात-व्यवहार में जमाना के नवका रूप झलकेला. सुन्नर बाबा ढेर पढ़ले ना रहले, बाकीर ऊ करीकी अक्षर के भँइस ना समुझस. पतरा-पोथी के...

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बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिए पर रही (बतकुच्चन – ११०)

बतिया पंचे के रही बाकिर खूंटवा रहिए पर रही. आजु जब बतकुच्चन करे बइठल बानी त सामने टीवी पर अइसने कुछ बहस चलत बा. पंच त पंच महापंच के बात अनठिया देबे पर लागल बा सभे. आ हमहु एह पर बेसी कुछ ना कहब काहे कि कहल गइल बा कि जर जोरू जमीन...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १८

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) सतरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़त रहलीं मीनू का बारे में. कि कइसे ओकरा गवनई का स्टाइल में लोग आपन आपा भुला जाव. अब ओहसे आगा पढ़ीं….. एक बेर त अजबे हो गइल. कुछ...

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