परनाम ईया
– डा॰ रमाशंकर श्रीवास्तव लोक-संस्कृति के कुँआ बड़ा गहिर होला. कुछ लोग ओमे झाँके तक से डेराला...
Read MorePosted by Editor | Jul 22, 2013 | पुस्तक चर्चा, साहित्य |
– डा॰ रमाशंकर श्रीवास्तव लोक-संस्कृति के कुँआ बड़ा गहिर होला. कुछ लोग ओमे झाँके तक से डेराला...
Read More– अनुप पाण्डेय आग लागो बेरहा परो अइसन विकास में गांव अबो खड़ा बा पहिलका इतिहास में भूख खा के...
Read More– संतोष कुमार नवीन जागरण युग के अग्रदूत के रूप में हिंदी साहित्य में स्थापित “कबीर” आजु जनता के हृदय में व्यक्ति के रूप ना बलुक प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित बानी. भगवान् बुद्ध के बाद उत्तर भारत में सामाजिक क्षेत्र में नव...
Read MorePosted by Editor | Jun 30, 2013 | पुस्तक चर्चा, भाषा, सरोकार, साहित्य |
भोजपुरी पंचायत के जुलाई २०१३ के अंक सामने बा आ ओकरा के पढ़त घरी प्रभाकर पाण्डेय के लिखल व्यंग्य रचना के एगो लाइन पर आँख अटक के रहि गइल कि “बुरा जो देखन मैं चला, मुझसे बुरा ना कोय”. फेर याद आ गइल कहीं पढ़ल एगो चरचा. ओह...
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