श्रेणी: साहित्य

कबीर, भोजपुरी एवं चंपारण

– संतोष कुमार नवीन जागरण युग के अग्रदूत के रूप में हिंदी साहित्य में स्थापित “कबीर” आजु जनता के हृदय में व्यक्ति के रूप ना बलुक प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित बानी. भगवान् बुद्ध के बाद उत्तर भारत में सामाजिक क्षेत्र में नव...

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बुरा जो देखन मैं चला मुझ से बुरा न कोय!

भोजपुरी पंचायत के जुलाई २०१३ के अंक सामने बा आ ओकरा के पढ़त घरी प्रभाकर पाण्डेय के लिखल व्यंग्य रचना के एगो लाइन पर आँख अटक के रहि गइल कि “बुरा जो देखन मैं चला, मुझसे बुरा ना कोय”. फेर याद आ गइल कहीं पढ़ल एगो चरचा. ओह...

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हमके हीन मत समझीं

– डॉ॰ आशारानी लाल हम अपना बारे में रउवा सभे से कुछ बतावल चाहत रहीं. कुछे नाहीं, बहुत कुछ बतइतीं, चाहें भर जिनगी के कहनी कहतीं, बाकी का कहीं – अपन नउँवें बतावत के नऽ हमरा लाज घेर लेले बा. सोचतानी कि हमार नउँवा सुनिये...

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मनोज भावुक के एकल कथा पाठ

मनोज भावुक के कहानीकार का रूप में बहुत कमे लोग जानेला. अधिका लोग उनका के कवि आ फिल्म समीक्षके का रूप में जानेला. पिछला दिने मैथिली-भोजपुरी अकादमी, दिल्ली तीन दिन के एगो साहित्यिक पर्व के आयोजन नई दिल्ली के मंडी हाउस का त्रिवेणी...

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प्रेम के लहर

– केशव मोहन पाण्डेय जमाना बदलऽता, एकर लछन शहर से दूर गाँवो-देहात में लउकऽता. अब ठेंपों छाप लोग के बात-व्यवहार में जमाना के नवका रूप झलकेला. सुन्नर बाबा ढेर पढ़ले ना रहले, बाकीर ऊ करीकी अक्षर के भँइस ना समुझस. पतरा-पोथी के...

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