Category: साहित्य

कइसन रही अगर अँजोरिया भोजपुरी किताब प्रकाशन का मैदान में उतरे?

किताब के लिखो जब केहू छापही वाला नइखे. किताब के छापो जब केहू खरीदही वाला नइखे. किताब कइसे खरीदे केहू जब किताब लिखइबे ना करी, छपबे ना करी. किताब कइसे खरीदाव जब घर खरची चलावले मुश्किल होखल जात बा. समस्या विकट बा. कहाँ से शुरू कइल...

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लोक कवि अब गाते नहीं – १९

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) अठरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़नी कि कइसे मीनू अपना भतार से झगड़ा क के लोक कवि के लगे रखैल बने चल अइली आ लोक कवि उनुका के ठाँव दिहलें बाकिर रखैल बनावे से मना कर दिहलें....

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कचरा

– डॉ॰ आशारानी लाल कचरा के कहानी ओकरे जबानी अइसे त हम बेजान बानी, हमरा मुँह में जबान हइए नइखे...

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