Category: साहित्य

लोक कवि अब गाते नहीं – १९

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) अठरहवाँ कड़ी में रउरा पढ़नी कि कइसे मीनू अपना भतार से झगड़ा क के लोक कवि के लगे रखैल बने चल अइली आ लोक कवि उनुका के ठाँव दिहलें बाकिर रखैल बनावे से मना कर दिहलें....

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कचरा

– डॉ॰ आशारानी लाल कचरा के कहानी ओकरे जबानी अइसे त हम बेजान बानी, हमरा मुँह में जबान हइए नइखे...

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कबीर, भोजपुरी एवं चंपारण

– संतोष कुमार नवीन जागरण युग के अग्रदूत के रूप में हिंदी साहित्य में स्थापित “कबीर” आजु जनता के हृदय में व्यक्ति के रूप ना बलुक प्रतीक के रूप में प्रतिष्ठित बानी. भगवान् बुद्ध के बाद उत्तर भारत में सामाजिक क्षेत्र में नव...

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