दुमुंहा
– जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ललछौंहा कवनों फोड़ा टीसत रहे कुलबुलात रहलें चोरी चुपके परजीवी कृमि...
Read More– प्रिन्स रितुराज छन छन छनके आहट सुन के मन गचके जाने कवन राहे अइहें इहे सोच के मन खटके. आदत...
Read Moreफहरावs फहरावs तिरंगा आसमान में फहरावs । केसरिया के अमर सनेसा शान्ति रहो सुख चैन रहो तप के धनी रहो...
Read More– डॉ राधेश्याम केसरी ढहल दलानी अब त सउँसे, पुरवइया क झांटा मारे, सनसनात ठंढा झोका से, देहिया...
Read More– हरेंद्र हिमकर कहिया ले अाशा के तमाशा चली भाई लोगिन ? कहिया ले दिल्ली के दुलारी भोजपुरिया?...
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