पारंपरिक निरगुन
– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ (1) के रे जनम दिहलें, के रे करम लिखलें कवन राजा आगम जनावेलें हो राम ।। ब्रम्हाजी जनम दिहलें, उहे रे करम लिखलें, जम राजा आगम जनावेलें हो राम।। माई-बाप घेरले बाड़े मुँहवा निरेखत बाड़ें हंस...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ (1) के रे जनम दिहलें, के रे करम लिखलें कवन राजा आगम जनावेलें हो राम ।। ब्रम्हाजी जनम दिहलें, उहे रे करम लिखलें, जम राजा आगम जनावेलें हो राम।। माई-बाप घेरले बाड़े मुँहवा निरेखत बाड़ें हंस...
Read More– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल झीमी-झीमी बूनी बरिसावेले बदरिया लागेला नीक ना । हँसे सगरी बधरिया लागेला नीक ना । सरग बहावेला पिरितिया के नदिया छींटे असमनवा से चनवा हरदिया धरती पहिरि लिहली हरियर चुनरिया लागेला नीक ना । नील रंग के...
Read More– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” सच बोलहू में अब सवाल हो रहल बा, खुदके मिटावे खातिर बवाल हो रहल बा, ना रही बाँस ना बाजी बाँसुरिया ऐ विष्णु, कफ़न ओढावे खातिर कमाल हो रहल बा़॥ महाभारतानुसार अब गुरु शिक्षक हो रहल बा,...
Read More– नर्वदेश्वर पाण्डेय देहाती बदली समाज अब स्वच्छता अभियाने से, जागरुक होत हई घर-घर बबुनिया. बाबुजी हमरा के ओइजा ना बिअहब, जवना घरे बनल ना होई लैटिनिया. देखीं महराजगंज प्रियंका सखी का कइली, ससुरा के छोड़ मायका गइली...
Read More– ऋतुराज (1) चाननी जइसन रूपवा के तोड़ नइखे भोर, भोर हो गइल ऊ अॅंजोर नइखे. चुप कराईं त आउर ज़ोर से बाजे तोहरा पायल सन केहू मुँहजोड़ नइखे. तोहरा पाछे बहुत बा हमें ठोक लऽ हमरा हीया के पिरितिया के जोड़ नइखे. होई हमर किसानी तोहरा...
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