टैग: पाती

तनी हट-हटा के ….

– प्रगत द्विवेदी बचपन से आजु ले पिताजी के भोजपुरी-भोजपुरी रटत देखत अइलीं. ऊ आजु ले ना थकलन, बाकिर हमनी का जरूर घबड़ा गइली जा. भोजपुरी के पहिचान, ओकरा प्रसार आ विकास के बात-बखान सुनत हम बलिया से आके दिल्ली रहे लगनी बाकि आजु...

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हिंदी खातिर भोजपुरी के बिसार दिहलें भोजपुरिया साहित्यकार

अतवार का दिने बलिया में ‘हिंदी के भेद से भाषिक अस्मिता को नुकसान’ विषय पर बोलावल गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि आइल विश्व भोजपुरी सम्मेलन के अंतर्राष्ट्रीय सचिव डॉ.अरुणेश नीरन कहलन कि हिंदी के श्रेष्ठ साहित्य लोके भाषन...

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‘प्रेम-कविता’ पर केन्द्रित पाती के अंक

कुछ साथी-सहयोगियन का सुझाव / निहोरा पर जब ‘प्रेम’ पर केन्द्रित कविता पर अंक के बिचार बनल त हम जल्दी-जल्दी भोजपुरी कवियन से संपर्क सधनी. ओइसे त प्रतिक्रिया उछाहे भरल रहे, बाकिर कुछेक भाई लोग अइसनो मिलल, जे या त लजइला लेखा या अजीब...

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भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि "पाती"

“भोजपुरी दिशाबोध के वैचारिक साहित्यिक पत्रिका “पाती” एगो अइसन रचनात्मक मंच ह जवन भोजपुरी भाषा साहित्य के एगो नया पहिचान दिहलसि. एकरा रचनात्मक आंदोलन से जुड़ के अनेके लेखक राष्ट्रीय स्तर पर आपन पहचान...

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साल 2012 के बिदाई आ गलचउर

(पाती के नयका अंक, दिसंबर २०१२, के संपादकीय) (भोजपुरी दिशा बोध के पत्रिका “पाती” के भोजपुरी प्रकाशनन में एगो खास जगहा बा. अँजोरिया के एह बात के खुशी बा कि पाती संगे एकर अपनापन पिछला कई बरीसन से चलल आवत बा. पाती के...

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