दू गो गीत
– अक्षय कुमार पाण्डेय (1) बसन्त चमचम चमके लागल पीतर सोना जइसन भाई – समझऽ अब बसन्त आइल हऽ। पुरुवा से पछया झगरत बा दुपहर साँझ फजीरे, पाथर के रसरी रगरत बा हँसि-हँसि धीरे-धीरे, उतर गइल पानी इनार के उकचे लागल काई, समझऽ अब...
Read More– अक्षय कुमार पाण्डेय आन्हीं में, पानी में, जरत रहे दिया, हिया माने ना हार, जिया ठाने ना रार – तोंहे गीत कऽ कसम. धीरे धीरे जमल अन्हार कुल्ह पघिल जाई सोन किरिन आके जब धरती से मिल जाई. चढ़ ऊपर, ऊपर चढ़, थाके ना जोर...
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