टैग: अशोक द्विवेदी

नाता जोरे भर नेह

– डाॅ. अशोक द्विवेदी आज फजिरहीं बहरा निकलते झमरझम बरखा से सामन भइल. राजधानी घंटन बरखा से नहात रहे. गाँवे़ं फोन लगाइ के एगो सँघतिया से टोह लेहनी त पता चलल कि उहाँ बादर क नाँवे-निशान नइखे. परसों तनी मनी सीति चाटे भर पानी परल...

Read More

सपना देखल आ देखावल

– डाॅ. अशोक द्विवेदी चउधुरी साहेब के पम्पिंग सेट जब मर्जी होला तबे चलेला. दस लीटर डीजल दिहला पर, तीन चार दिन दउरवला का बाद एक दिन चलल त रामरतन के बेहन परि गइल आ जब रोपे क बेरा आइल त कीच-कानो भर क बरखा भइल. दू दिन का छिलबिल...

Read More

धरना प्रदर्शन से लवटि के

बियफे, 6 अगस्त, जंतर मंतर, नई दिल्ली. धरना प्रदर्शन क पेटेन्ट जगह. ‘वन रैंक वन पेंशन’ पर जुटल जुझारू फौजी भाइयन का धरना-शिविर का सटले, सोझहीं हमनियो का “भोजपुरी भाषा के आठवीं अनुसूची में शामिल करे खातिर”...

Read More

पाती के “प्रेम-कथा विशेषांक” पर बतकही

अभाव आ गरीबी पहिलहूँ रहे. दुख-दलिद्दर अइसन कि रगरि के देंहि क चोंइटा छोड़ा देव. लोग आपुस में रोइ-गाइ के जिनिगी बिता लेव, बाकिर मन मइल ना होखे देव. हारल-थाकल जीव के प्रेमे सहारा रहे. धीरज आ बल रहे. आजु एतना तरक्की आ सुबिधा-साधन का...

Read More

जेएनयू के भारतीय भाषा केन्द्र में भइल परिचर्चा आ काव्यपाठ

“‘पाती’ पत्रिका भोजपुरी रचनाशीलता के आंदोलन के क्रांति-पताका हऽ. ‘पाती’ माने, नयकी पीढ़ी के नाँवे सांस्कृतिक चिट्ठी. एगो चुपचाप चले वाला सांस्कृतिक आंदोलन हवे ‘पाती’, जवना के अशोक द्विवेदी अपना संसाधन से चुपचाप चला रहल...

Read More

Recent Posts

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..