कोयला त कोयले ह…
– सुशील झा लड़िकाईं कें अधमुंदाइल आँखिन से अबहियों याद बा कि घर में कोयला प्लास्टिक के छोटहन बोरा में आवत रहे. एगो चूल्हा होखल करे लोहा आ माटी के बनल जवना में लकड़ी आ कोयला डाल के हवा कइला पर आग जरत रहुवे. कोयला गोल ना रहत...
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