कविता लिखे के लकम
– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ सन् 1976-77 में, जब हम गाँव के प्राथमिक विद्यालय में तीसरा-चउथा के विद्यार्थी रहीं, ओह घरी हर सनीचर के अंतिम दू घंटी में सांस्कृतिक कार्यक्रम होखे. ओकरा में हमनी कुल्ह विद्यार्थी इयाद...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ सन् 1976-77 में, जब हम गाँव के प्राथमिक विद्यालय में तीसरा-चउथा के विद्यार्थी रहीं, ओह घरी हर सनीचर के अंतिम दू घंटी में सांस्कृतिक कार्यक्रम होखे. ओकरा में हमनी कुल्ह विद्यार्थी इयाद...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ कलाम के शत शत नमन माथ ऊँचा हो गइल दुनिया में भारतवर्ष के सफल परमाणु परीक्षण बा विषय अति हर्ष के देश का ओह सब सपूतन के बधाई आ नमन जिनका पाके आज पवलस राष्ट्र एह उत्कर्ष के. शांति...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ लोर ढारत निहारत रहे राह जे, ओह अँखियन से पूछीं ह का जिन्दगी। पाके आहट जे दउड़ल दरद दाब के, ओह दिल से ई पूछीं ह का जिन्दगी।। पीड़ पिघले परनवा के जब जब पिया हिया हहरे मिलन लागी तड़पे जिया...
Read Moreविश्व भोजपुरी सम्मेलन के बलिया इकाई अउर पाती सांस्कृतिक मंच के एगो बड़हन आयोजन पिछला अतवारा का दिने बलिया के टाउन हाल बापू भवन में भइल. एह आयोजन के पहिला सत्र में पाती संपादक डा॰ अशोक द्विवेदी, प्रो॰ अवधेश प्रधान आ प्रो॰ सदानन्द...
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