टैग: पत्रिका

केने बाड़ें ऊ लोग जिनका भोजपुरी प नाज बा

– कुलदीप कुमार कहे के त कहल जाला कि जवन भासा रोजगार के मौका ना दिआ सके ओह भासा के अस्तित्व गँवे-गँवे खतम हो जाला. बाकिर ई बाति भोजपुरी प का साथे ठीक नइखे बइठत. सीधा से देखीं त अबहीं ले भोजपुरी के संवैधानिक दर्जा नइखे मिलल...

Read More

पाती के चौहत्तरवाँ अंक का बहाने कुछ मन क बात

– अशोक द्विवेदी पत्रिका के 74वाँ अंक रउवा सभ के सामने परोसत हम अपना स्रम के बड़भागी मान रहल बानी जे 1979 से जूझत-जागत, ठोंकत-ठेठावत हमनी का पैंतीसवाँ बरिस में चलि अइली जा। एह यात्रा में, सँग-सँग कुछ डेग चले वाला हर...

Read More

जिए भोजपुरी ! बाकिर जिए त जिए कइसे?

भोजपुरीए ना हिन्दीओ पत्रिकन के प्रकाशन आजुकाल्हु मुश्किल हो गइल बा काहे कि एक त लोग पढ़े के आदत छोड़ दिहले बा आ दोसरे किताब खरीदे के. रोज रोज के खरचे जुटावल जब मुश्किल बनल होखे त किताब भा पत्र-पत्रिकन के के खरीदो. बाकिर सवाल बा...

Read More

भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक

बावन पेज के पत्रिका, चार पेज विज्ञापन के, चार पेज संपादकीय सामग्री, बाँचल चउवालीस पेज. तरह तरह के तेरह गो संपादक बाकिर प्रूफ आ भाषा के गलतियन के भरमार का बीच भोजपुरी पंचायत पत्रिका के दिसम्बर 14 वाला अंक में भोजपुरी में मिलल...

Read More

भोजपुरी पंचायत के नवम्बर 14 के अंक

– – ओमप्रकाश सिंह आजुए ईमेल से मिलल भोजपुरी पंचायत पत्रिका के नवम्बर 2014 अंक देखि के मन मिजाज खुश हो गइल. अगर भोजपुरी से छोह के बात हटा दिहल जाव त पत्रिका के कलेवर बहुते स्तरीय बा. सोना पर सोहागा वाला बाति होखीत अगर...

Read More

Recent Posts

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..