किराया आ भाड़ा (बतकुच्चन – 189)
कहे खातिर त तुलसिए बाबा कह गइल बानी कि ठठा के हँसल आ गाल फुलावल एके साथे ना कइल जा सके. बाकिर आजु के जमाना में एह तरह के नमूना आए दिन देखे के मिले लागल बा. संगही रहि के एक दोसरा से घात करे के चलन बढ़ल जात बा. नया तरीका, नया...
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