बाढ़ि खातिर व्याकुल नेता जी
– जयंती पांडेय का हो बाबा, काल्हु गइल रहीं नेताजी से भेंट करे. बड़ा उदास आ मायूस लागत रहले. हर बतिये में कहीं ना कहीं से बाढ़ के घिंच ले आवत रहले. हमरा कुछ ना बुझाइल. हम त बूझनी कि कहीं अण्णा बुढ़ऊ के भ्रष्टाचार मेटावे वाला...
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