भीड़ का बीच अकेला होखला के दुख..

– पाण्डेय हरिराम 80 के दशक के एगो गाना हजारन दिल के छूवत ऊ तार खनका दिहले रहुवे, ओह भावना के उभार दिहले रहुवे जवना के लोग महसूस त करत रहे लेकिन या त लोग का लगे बयान करे लायक शब्द ना रहत रहे भा हिम्मत. एह गाना का साथ हर ऊ...

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