राम जी के चिरई राम जी के खेत…
– आशुतोष कुमार सिंह राम जी के चिरई, राम जी के खेत. खा ल चिरई भर-भर पेट. ई लाइन हमनी का लइकाइएं से सुनत आ रहल बानी जा. एह लाइन प धेयान से सोचला प ई महसूस होखेला कि ई एगो पंक्ति में हमनी के संस्कार आ संस्कृति के सार छुपावल...
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