धूर
– चौधरी कन्हैया प्रसाद सिंह “आरोही” गाँव का दक्खिन पश्चिम का कोना पर एगो विशाल कोठीनुमा मकान बा. ओह पर लिखल त बा श्रीराम भवन बाकिर दसई भवन का नाम से विख्यात बा. मकान मालिक का पुरखन में केहू दसई भइल होई. प्रखण्ड...
Read More– शिवजी पाण्डेय ‘रसराज’ सावन आइल तूँ ना अइलऽ गइलऽ कवना देस अँगनवा लागेला परदेस! हरियर धरती लगे सुहावन, करिया बदरा डोले, दुअरा पर झिंगुर झँकारे, ताले दादुर बोले, पानी-भरल बदरिया झूमे, उड़ा के करिया केस. अँगनवा...
Read Moreसुने में कुछ अजीब लागत बा बाकिर साँच कुछ अइसने बा. .co कोलम्बिया खातिर दिहल सेकन्ड लेवल डोमेन हवे. अचानक एह टीएलडी के स्वामित्व वाली कंपनी के लागल कि डॉट को के फायदा काहे ना उठा लिहल जाव. डॉट को आ डॉट कॉम में फरके कतना बा. बस...
Read Moreजिनगी एगो खेल ह. हार-जीत एहू में होखत रहेला. जे हार से सीख लेके जीते के प्रयास करेला, ओकरा जीत जरूर मिलेला. कहल जाला कि जे युद्ध के पंजरा जइबे ना करी ओकर का हार चाहे का जीत. बाकिर आज हम जिनगी रूपी खेल के चरचा नइखीं करे जात बलुक...
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