दू गो गजल
– रामरक्षा मिश्र विमल १ जहें नेह लागल दरदिए मिलल बा कबो फूल कँहवा अङनवा उगल बा ? कबो लहलहाइल ना बिरवा सपन के कतनो नयनवा से पानी ढरल बा कल तक पियावल जे अँजुरी से अमिरित ओकरे अँजुरिया जहर से भरल बा केकरा से आशा बिस्वास के पर...
Read MorePosted by Editor | Aug 6, 2010 | भोजपुरिया लाल, सरोकार, साहित्य |
– संतोष कुमार पटेल भिखारी ठाकुर भोजपुरी माई के एगो लाल मनई में कमाल अइसन पूत के पाके धरती हो गइली निहाल. काहे कि अइसन लोग धरती पर बेर बेर न आवेलें सांच सीधा गीत न गावेलें परेम के नेह के सनेह विछोह विराग के हियवा में धधकत...
Read More– आशुतोष कुमार सिंह इतिहास गवाह बा जवन भाषा आपन विस्तार करे में सफल रहल बिया ओकर लोहा पूरा दुनिया मनले बा. कवनो देश-दुनिया के कवनो कोना के मिजाज जाने खातिर ओहिजा के स्थानीय भाषा के जानल जरूरी होखेला. कहल गइल बा कि भाषा से...
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