कविता के जरुरत बा
– रवि कुमार गिरी गुरुजी न सार के जरुरत बा न बिचार के जरुरत बा , कविता लिखत बानी कविता के जरुरत बा , सोच होखे समझ होखे एपर केहू ध्यान ना दी , चटक मटक लिखी समाज के कुछ ज्ञान ना दी , पाहिले लोग खोजत बा कुछ खुला कुछ कसाव ,...
Read More– रवि कुमार गिरी गुरुजी न सार के जरुरत बा न बिचार के जरुरत बा , कविता लिखत बानी कविता के जरुरत बा , सोच होखे समझ होखे एपर केहू ध्यान ना दी , चटक मटक लिखी समाज के कुछ ज्ञान ना दी , पाहिले लोग खोजत बा कुछ खुला कुछ कसाव ,...
Read Moreभोजपुरी के सबले बर सोशल साइट जय भोजपुरी डॉट कॉम के एक साल पूरा भइला का उपलक्ष्य में दिल्ली का आईटीओ स्थित राजेन्द् भवन में एगो कार्यक्रम के आयोजन कइल गइल बा जवना में साइट के सदस्यन का अलावे दोसरो भोजपुरियन के शामिल होखे के उमेद...
Read More– गनेश जी “बागी” बाबूजी सिखवले दुःख सहीहs अपार, कबो ना करीहs बबुआ, केकरो प वार, गलती ना करीहऽ अइसन, पिटे पड़े कपार, दुनिया में कुछु ना रही, रह जाई बस प्यार. बहुते आसान होला, दिल के दुखावल, दोसरा के कइला में,...
Read MorePosted by Editor | Jul 13, 2010 | भोजपुरिया लाल, सरोकार |
– आशुतोष कुमार सिंह सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से, मोर प्रान बसे हिम-खोह रे बटोहिया एक द्वार घेरे राम हिम-कोतवलवा से, तीन द्वार सिंधु घहरावे रे बटोहिया. ई गीत के सुनते मन में एगो गजब के आनंद के अनुभूति होखेला. भोजपुरी...
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