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केकरा पर करीं हम गुमान रामप्यारे !

– शिलीमुख उनइस बरिस पहिले हम प्रसिद्ध कवि चन्द्रदेव सिंह क एगो रचना पढ़ले रहलीं. साइत 1997 में “पाती” अंक -२३ में छपल रहे. बरबस आज ओकर इयाद आ गइल बा त रउवो सभे के पढ़ा देत बानी – केकरा प’ करब s गुमान...

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राजनीति के कन्फ्यूजियाइल

– शिलीमुख बात के बतंगड़ बनावल एघरी अइसन प्रचलन में आ गइल बा कि पूछीं मत. देश के राजनीतिक दल एकरा के आपन प्रमुख अस्त्र बना लेले बाड़ें सऽ. हर बात में हुज्जत करत ”धोती-कुर्त्ता फार के/ सड़क प निकल जा झार के.“ मीडिया चैनलन के...

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फेरू बैतलवा डाल पर…

– शिलीमुख हमहन का लोकतंत्र में अक्सर हुल्ल-हपाड़ मचत रहेला. ऊहो एकदम ठेठ अंदाज में. कबो संसद का भीतर त कबो बाहर. घोटाला, लूट आ भ्रष्टाचार पर कवनो साल बाँव (खाली) ना जाला. बलुक अब त हर चार-छव महीना में घोटाला के नये-नया...

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