गजल – हीरालाल ‘हीरा’
– हीरालाल ‘हीरा’ सुर साधीं तऽ लय बिगड़े, बे-ताल के बनल तराना बा। जिनिगी गावल बहुत कठिन बा,...
Read More– हीरालाल ‘हीरा’ सुर साधीं तऽ लय बिगड़े, बे-ताल के बनल तराना बा। जिनिगी गावल बहुत कठिन बा,...
Read More– हीरा लाल ‘हीरा’ जड़वा लपकि के धरेला गरदनवाँ देंहियाँ के सुई अस छेदेला पवनवा !...
Read More– हीरालाल हीरा 1) हारि के वानर सिन्धु कछार बिचारेले के अब प्रान बचाई? फानि पयोनिधि के दस कन्धर के नगरी, जियते चलि जाई? राक्षस के पहरा दिन-राति सिया के सुराग कहाँ लगि पाई? जो न पता लगिहें त सखा सुग्रीव से बोलऽ ना का जा...
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