आरक्षण शत-प्रतिशत क द बाकिर —-

– टीम अंजोरिया

#शत-प्रतिशत-आरक्षण #एगो-विचार #भोजपुरी

(बेलाग-लपेट)

आरक्षण शत-प्रतिशत क द बाकिर —-

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आजु के लेख के मथैला बहुते सोच समुझ के लिखले बानी। जानत बानी कि आरक्षण एगो अइसन विषय ह जवना पर अगर बहुते सोच समुझ के आपन राय ना दिहल जाव त एगो बखेड़ा खड़ा हो सकेला। ठीक वइसहीं जइसे एक जमाना में ओह घरी प्रधानमंत्री रहल विश्वनाथ प्रताप सिंह देश में मण्डल कमीशन लागू करा के कइले रहलन। हम आरक्षण के समर्थक हईं बाकिर जाति ह विश्वनाथे प्रताप वाला। अन्तर बस अतने बा कि विश्वनाथ प्रताप ई काम तथाकथित पिछड़ा समाज के भलाई खातिर ना करिके आपन सत्ता सुरक्षित करे ला कइले रहलन। हमरा लगे ना त सत्ता बा ना संपत्ति ना कवनो अइसन प्रयोजन जवना खातिर हमरा कुछ गलत करे के, गलत कहे के मजबूरी बनल होखे। हम त आपन राय साझा कर रहल बानी रउरा सभे से। हमार मकसद बस अतने बा कि आरक्षण के विषय पर सही तरह से चरचा होखे आ समाज के ओह वर्ग के नवहियन के एकर पूरा जानकारी विस्तार से दीहल जाव जवनन ला आरक्षण के ई झुनझुना देखावल जाला।

आरक्षण शत प्रतिशतो हो जाव तबो समाज के, देश के वइसन नुकसान ना होखी जइसन अबहीं के पचास प्रतिशत आरक्षण से हो रहल बा। आरक्षण के लाभ समाज में सही तरीका से बँटा नइखे पावत काहें कि ओकरा पर कुछ बड़हन जाति-समूह काबिज हो गइल बाड़न। एह पर आगे बढ़े से पहिले एगो वाकया इयाद पड़ गइल त पहिले उहे सुना दिहल चाहत बानी। संदर्भ दोसर बा बाकिर ओह घटना के एह विषय पर राखल जा सकेला –

भोज के पंगत बइठल रहल। सभे अपना पत्तल पर परोसल सामग्री खात रहे आ जब कुछ घटे त परोसेवालन के बोला लेव। आ गाँव समाज के अइसना भोज में खाए वाला आ परोसे वाला दुनु एक दोसरा के जानेलें-पहिचानेलें। त एगो अनुभवी आदमी परोसे वाला के (सगरी अंगुरी पसार फइला के सबराहे वाला ) इशारा करत जोर से आवाज लगवलन – हमरा के जेही-तेही ( आ फेर अगिला बात कहे से पहिले सगरी अंगूरी समेट के इचकी-इचकी वाला इशारा करत बोललन) भाई लोग के दिए जा! जे देखल से बूझ गइल बाकिर जे बस आवाजे सुनल ऊ वाहवाही कर उठल ओह मनई के।

आरक्षणो के साथे इहे भइल। आरक्षित वर्ग में जे समर्थ रहल से सगरी हिस्सा पर केंचुली मार के बइठ गइल। ओकरा समग्र पिछड़ा वर्ग के चिन्ता त दूर अपना जातो के चिन्ता ना रहल। ऊ त बस आपन आ अपना परिवार के बढ़ावे में लाग गइल। जबकि होखे के चाहत त ई रहल कि हर बेर ओह नवही के मौका मिले जेकरा लगे बाप-दादा के संपति-विरासत ना होखे, जे अपना जाति समूह में अबहियों दबाइल कचराइल बा, जेकरा पुरखा पुरनियन के अबहीं ले आरक्षण के लाभ नइखे मिलल।

रउरा सभे में बहुते लोग होखी जे कही कि शत-प्रतिशत आरक्षण से देश के विकास अवरुद्ध हो जाई। जी ना! हम रउरा जइसन गलतफहमी में नइखीं जीयत। पइसा आ पंहुच का बल पर, नाजायज तरीका से नौकरी हासिल करे वाला बेसी नुकसान करेलें। डोनेशन देके मेडिकल आ इंजिनियरिंग के पढ़ाई करे वाला का प्रतिभा के सम्मान देलें? ना। बाकिर समरथ के नहीं दोष गुसाईं! जवना से हमरा फायदा मिलो ऊ देश-हित में आ प्रतिभा-हित में बा। बाकिर अगर दोसर केहू के मिलो त देश-हित आ प्रतिभा-हित से बाहर के बात हो जाई।

तब सवाल उठावल जाई कि जाति आधारित ना कर के आर्थिक आधार पर आरक्षण दिहल जाव. मोदी सरकार इहो क दिहले बिया बाकिर ऊंट के मुँह में जीरा! हमहन के देश आ समाज में शत-प्रतिशत आरक्षण हमेशा से रहल बा। कुछ काम समाज के एक वर्ग ला त कुछ काम दोसरा वर्ग ला आरक्षित कर दिहल गइल रहुवे। बाप-दादा के संपति के खुशी-खुशी उपभोग करे वाला के बाप-दादा के करजो चुकावे के पड़ी। बाकिर हमनी का एह बात ला तइयार नइखींं। समाज के एगो बड़हन वर्ग के शिक्षा से दूर राखल गइल रहल आ ओकरा के स्किल सिखा के जीविका कमाए वाला बना दिहल गइल रहल। आ आजु का भाषा में व्हाइट कॉलर अवसर समाज के प्रभावशाली वर्ग ला आरक्षित कर के राखल रहुवे। आजु का समाज में प्रभावशाली बन चुकल समाज अब उहे सुविधा अपना ला चाहे लागल बा। दिक्कत बा त ई कि ऊ ई सगरी लाभ अपना ला चाहत बावे अपना दोसर कमजोर भाईयन ला ना। तीनपुश्त से आरक्षण के मलाई काटे वाला परिवार के नवही अपने समाज के ओह नवहियन के मौका नइखे दीहल चाहत जे अबहीं ले एह लाभ के सवादो नइखे चख पवले।

होखे के ई चाहीं कि जाति आधारित आरक्षण में ओही जाति के ओह नवही के मौका मिले के चाहीँ जे अबहीं ले उपेक्षित रहल बा। जेकरा कुल खानदान में अबहीं ले केहू एकर लाभ नइखे उठवले। आ सगरी चयन ओह अवसर, ओह पद ला निर्धारित अर्हता का आधारे पर होखे के चाहीं। अगर अर्हता पूरा नइखे हो पावत त ओह नवहियन के सघन प्रशिक्षण दे के एकरा ला तइयार कइल जाव। जगह आजु ना दू बरीस बादे भराव। बाकिर योग्यता से कवनो समझौता ना कइल जाव। ओह जाति वर्ग के उपेक्षित रह गइल नवहियन से अगर जगह ना भर पावे तबहियें दुसरी प्राथमिकता का दौर में ओकरा के मौका दीहल जाव जेकर बाप-महतारी आरक्षण के लाभ उठवले होखो आ तिसरका प्राथमिकता का दौरान जेकर दू पीढ़ी एकर लाभ उठा चुकल होखे। कवनो डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, मैनेजर, अधिकारी, विधायक, सांसद के वंशजन के एह लाभ से तबले अलगा राखल जाव जबले ओकरा जाति के हर परिवार तक आरक्षण के सुविधा ना चहुँप जाव।

हमरा सबसे दुख आ पीड़ा ई देख के होखेला कि आजु अपना के पिछड़ा कहावे ला एक दोसरा से मारामारी हो रहल बा। जबकि पिछड़ा कहल अपमानसूचक माने के चाहींं। केहू के ओकरा जाति का नाम से भा पिछड़ा समाज के कह के संबोधित कइल भा ओह तरह से बेवहार कइल अपराध माने के चाहीं।

सेना-पुलिस में बहाली खातिर शारीरिक दक्षता आ कौशल के पूरा मान राखल जाव। जातिगत आरक्षण होखो त होखो बाकिर दक्षता के अर्हता पूरा होखे के चाहीं।

जानत बानीं कि रउरा सभे के आदत नइखे अपना विचार के लिपिबद्ध करे में। तबहियों एगो निहोरा बा कि एक लेख का नीचे दीहल जगहा में आपन विचार (कमेंट) जरुरे लिखीं। भोजपुरी में लिखे में दिक्कत होखो त हिन्दी में लिख सकिलें, अंगरेजी में लिख सकिलें, रोमन लिपि में लिख सकिलें। राउरो विचार जानल जरुरी बा।

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