– – डॉ. ओ. पी. सिंह
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भोजपुरी दिशा-बोध के पत्रिका पाती के मार्च 2009 वाला अंक से साभार
भोजपुरी वेवसाइट: भोजपुरिया भौकाल
भोजपुयिन के ई खासियत होला कि अउरी कुछु होखे भा ना, भौकाल बनावे में कवनो कमी ना रहे देला लोग, खाये में चटनी भेटाय चाहे ना पोदीना जरूर बावन बिगहा में बोवाला।
आजु से सात बरिस पहिले के बात हऽ दुनिया में इन्टरनेट त पहिलहीं आ चुकल रहवे बाकिर हिन्दुस्तान खातिर नया बात रहुवे। दुनिया का कोना कोना में फइलल भोजपुरिया नेट पर
आपन मौजूदगी देखावे में पीछे ना रहलन आ अंगरेजी में भोजपुरी के बात शुरू हो गइल। शुरूआत कइलन शशिभूषण राय आ विनय पाण्डे, याहू पर एगो समूह बनावल गइल भोजपुरी संसार का नाम से आ देश दुनिया के भोजपुरिया धीरे धीरे ओह से जुड़े लगलन आ भोजपुरी संसार एगो बड़हन समूह बन गइल।
एह सब से दूर भारत का एगो कोना में बलिया से शुरू भइल अंजोरिया डॉट काम। शुरू करे वाला आदमी अबूझ रहे, भाषा से लगाव रहे, बाकिर बजार का बारीकी से ना त परिचित
रहे ना ओतना कूबत रहे। भोजपुरी के अनेकन विश्व सम्मेलन आ संस्था में से कवनो से जुड़लो ना रहे। ना त साहित्यकार रहे, ना साहित्यिक उठापटक से परिचित रहे।
भोजपुरी डॉट काम का नाम से सबसे पुरान वेवसाइट 10 सितम्बर 1999 के रजिस्टर्ड करावल गइल रहे, जवन आजुओ चालू बा, एकर कर्णधार हउवन विनय पाण्डे, जे रांची में प्रतिष्ठित
इंजीनियर हउवन। भोजपुरी के सबसे पुरनियन में से एक विनय पाण्डे कबो कवनो दोसरा वेवसाइट के प्रोत्साहित कइले होखस, एकर कवनो प्रमाण नइखे। हॅं जब एगो बरियार साइट खुलल त ओकर विरोध जरूर कइलन। विरोध के पर्याप्त कारणों रहे, बाकिर ओह पर तनी देर बाद चर्चा कइल जाई।
दोसर साइट रहे भोजपुरी डॉट आर्ग जवन 16 नवम्बर 2002 के रजिस्टर्ड भइल आ इहो अबले चालू बा बाकिर तब दुनू साइट अंगरेजी भाषा में रहुवे आ अंगरेजिये में भोजपुरी के बात
होखल करे, एही रेगिस्तान में तब अंजोरिया आपन पहिलका डेग धइलसि। अंजोरिया के रजिस्ट्रेशन 19 जुलाई 2003 के भइल, शुरूआते से अंजोरिया देवनागरी लिपि में भोजपुरी भाषा के पहिलका वेवसाइट का रूप में शुरू भइल। एगो नौसिखिया का तरह उठत गिरत अंजोरिया कई बेर ढहल ढिमिलाइल, बाकिर अपना लगन आ सनक में कवनो कमी ना आवे दिहलसि, आजु अंजोरिया भोजपुरी भाषा के प्रतिनिधि साहित्य से ले के फिल्मी चाट तक सब कुछ परोस रहल बिया आ दुनिया भर के भोजपुरिया लोग एह साइट के अपना रहल बा।
सब कुछ शान्त रहे जब ले एह तालाब में एगो ढेला पड़ल भोजपुरी संसार डॉट काम का नाम से। नाम सुनते भोजपुरी के पुरनिया लोग बिगड़ल काहे कि ऊ लोग एही नाम से एगो समूह
चलावत रहे आ स्वाभाविक रूप से केहू एहबात के पसन्द ना करी कि ओकरा नाम से मिलत जुलत कवनो दोसर साइट शुरू होखे। खास कर के तब जब नयका साइट व्यावसायिक होखे आ पुरनका गैर व्यावसायिक तब भोजपुरी संसार डाट काम चलावे वाला लोग 13 अक्टूबर 2005 के भोजपुरिया डॉट कॉम के नाम से एगो मजगर साइट शुरू कइलसि आ पूरा दुनिया में भोजपुरी के डंका बाज गइल. तकनीकी जानकारी संगठन आ व्यावसयिक दूरदर्शिता से भोजपुरिया डॉट काम देखते देखत सबसे लोकप्रिय भोजपुरी साइट बन गइल।
कहल जाता कि सफलता मिलला पर दू तरह के प्रतिक्रिया होला, कुछ लोग सफलता पर सवार होके अपना लक्ष्य का तरफ बढ़ निकलेला आ कुछ लोग पर सफलता सवार हो जाले आ ऊ लोग अपना सोझा दोसरा के कुछ ना समुझे। बाकिर अइसनका लोग ढेर दिन ले केहू का साथे चलियो ना पावे। दू आदमी एह साइट के शुरू कइलन आ देखते दुनू जाना में आपसी विवाद शुरू हो गइल कि के बड़ के छोट केकर योगदान बेसी आ केकर कम, आ तब दूनु जने अलगा हो गइलन आ शुरू भइल एगो नया दौर आपसी कड़ुवाहट के, एक दोसरा का नाम से मिलत जुलत साइट खुले लगली सन। केहू लिट्टी चोखा खोलल त दोसरा लिट्टी चोखा का बीचे एगो हाइफन लगा के शुरू हो गइलन। भोजपुरी दुनिया खुलल त duniya का बदले dunia इस्तेमाल कर लिहल गइल। बिदेसिया शुरू भइल त bidesia का बदले bidesiya चला लिहल गइल। मिलत जुलत नाम का सहारे दोसरा के पाठक के अपना साइट पर बोलावे का एह कोशिश से भोजपुरी वेब प्रकाशकन का बीचे एगो अइसन शीत युद्ध शुरू हो गइल जवन आजु ले जारी बा। केहू का केहू पर विश्वास नइखे।
भोजपुरी भाषा के एह शीत युद्ध से कतना नुकसान भइल आ कतना हो रहल बा एकर अनुमान भविष्य लगाई बाकिर आजु का भोजपुरी के प्रकाशक लोग अपना जिम्मेदारी से भाग ना पाई। आजु का समय में भोजपुरी के बहुते साइट चल रहल बाड़ी सन। नयका फैशन के सोशल साइट भोजपुरिया डॉट आर्ग शुरू भइल त देखते देखत भोजपुरी एक्सप्रेस डाट काम शुरू हो गइल। भोजपुरी एक्सप्रेस डॉट काम अपना बेहतर संगठन आ प्रस्तुतिकरण से आज भोजपुरियन के सबसे बड़ सोशल साइट बन के उभरल बा।
भोजपुरी पत्रिकन के साइट का रूप में ‘द संडे इंडियन’ के भेाजपुरी संस्करण, भोजपुरी संसार पत्रिका,भोजपुरी सिनेमा के पत्रिका भोजपुरी सिटी, आ अब बहुत जल्दिये ‘पाती’ ओ वेबसाइट का रूप में उपलब्ध बा, भोजपुरी वेबसाइटन के सबसे बड़ लिंक अंजोरिया पर उपलब्ध बा, बाकिर ओहिजो एकाध नाम से विरक्ति देखे के मिल जाई।
स्थिति ई बा कि कूल्हि सक्रियता का बावजूद, भोजपुरी के वेबसाइट, अभी अपना-अपना ढंग से, आगा बढ़ रहल बाड़ी स। बात दीगर बा कि भोजपुरिया लोगन क रूझान एमें बढ़ल नइखे।
(एने पाती के नयका अंक के रचनन के साझा करत आजु मन भइल कि काहे ना भोजपुरी दिशा-बोध के पत्रिका पाती के पुरनका अंक उरेहल जाव आ देखल जाव कि कवना रचना के फेर से सबका सोझा ले आवल जा सकेला। पाती पत्रिका के मार्च 2009 वाला अंक आ ओकरा बाद के सगरी अंक अंजोरिया पर मौजूद बा. सबले पुरनका अंक उरेहे लगनी त अंजोरिए से जुड़ल एगो लेख पर नजर पड़ गइल। एकरा के एगो ऐतिहासिक दस्तावेज का रूप में देखल जा सकेला. इंटरनेट पर भोजपुरी ले के शोध करे वालन ला एहमें के जानकारी कामे आ सकेला। दुख के बात बा कि चरचा में आइल अधिकतर वेबसाइट आजु का दिना मौजूद नइखीं स, भा मौजूदो बाड़ी सँ त बदलल रूप में। असल में होखेला ई कि अगर केहू अपना वेबसाइट के नवीनीकरण करावल छोड़ दिहल त केहू दोसरे ऊ नाम उड़ा लेला। बाकिर तब ओह नयका वेबसाइट के अपना पुरनका से कवनो नाता ना लउके। bhojpuri.com आ bhojpuri.org आजुओ मौजूद बाड़ी सँ बाकिर ओह पर कवनो सामग्री ना तब मौजूद रहल ना अब बा। भोजपुरी वेबसाइटन में सबले मजगर नाम bhojpuria.com आजु दोसरा हाथन में बा आ पूरा तरह से हिन्दी में।
पिछला दिने गूगल सर्च में हम एगो सवाल कइले रहीं – oldest bhojpuri website still running का बारे में जाने खातिर। परिणाम जवन सोझा आइल तवना से इहे साबित भइल कि “बहुत शोर सुनते थे पहलू में दिल का, चीरा तो एक बूंद खूं का न निकला!” जवन रिजल्ट गूगल अपना आर्टिफिशियल इंटलेजिन्स का सहारे परोसलसि तवन नीचे के स्क्रीन शॉट में देख लीं –
आ तीन गो नाम बहुते रेघरिया के देखवलसि ई ऐआई – Bhojpuri.org, Anjoria, Bhojpuria.com के। तीनों में से पता ना कवना कारण अंजोरिया का नाम का साथे डॉटकॉम दिहल भुला गइल। बरीस 2003 में शुरू भइल अंजोरिया के 2005 में शुरु होखे के बातो गलत देखवलसि. एह तीनो वेबसाइट के जब खोले के चहनी त जवन परिणाम आइल उहो देख लीं सभे –
अंजोरिया त रउरा देखते बानी. आ सबसे पहिले भोजपुरी नाम से पंजीकृत होखे वाला वेबसाइट bhojpuri.com का बारे में ई ऐ कुछऊ ना बतवलसि। बाकिर हमरा मालूम बा कि ई नाम सबसे पहिले पंजीकृत करावल गइल रहुवे आ आजु ले ई नाम सँजो के राखल गइल बा. अलग बात बा कि भोजपुरी त छोड़ीं एह वेबसाइट पर कवनो भाषा में कवनो सामग्री मौजूद नइखे –
अगर रउरा एह लेख में कवनो तथ्यगत गलती लउके त जरुरे बताईं। पाती पत्रिका के मार्च 2009 वाला अंक से एह लेख के जस के तस अंजोर कइल गइल बा।
– प्रकाशक, अंंजोरिया डॉटकॉम)





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