आपने सबले बड़का दुश्मन

– टीम अंजोरिया

#वाणिकी #वणिकई #शेयर-बाजार #भोजपुरी

आपने सबले बड़का दुश्मन
you are your own biggest enemy

(पुरान चार्ट बस देखावे खातिर)

ढेर दिन बाद आजु फेरु वाणिकी के चरचा ले के बइठल बानी। रउरा कहब कि दुनिया में विश्वयुद्ध जइसन हालात बनल जात बा आ हम वाणिकी पर चरचा करत बानी। का करीं, जब दुनिया युद्ध के विभीषिका झेलत रहुवे त हमनी का वेस्ट इंडीज जे हो रहल क्रिकेट मैच में व्यस्त रहनी सँ। क्रिकेट के ककहरो हमरा ना आवे बाकिर वाणिकी त हमरा व्यसन जइसन हो गइल बा। आ साँच कहीं त वाणिकी कम, शोध बेसी कइल करेनी हम।

सभे जानत बा कि बाजार के ताकत ओकर अनिश्चितते होला। जहिया बाजार निश्चित हो जाई तहिये बाजार के राम नाम सत्य हो जाई। शेयर बाजार का बारे में एगो बड़हन सच्चाई इहो हवे कि जब जोर से गिरेला त सगरो हाहाकार मच जाला। बाकिर जब जोर से उछलेला त केहू बातो ना करे ओकर. माने कि लोग मान के बइठल बा कि बाजार त उछलहीं खातिर होला। खबर त तबे होखी जब बाजार गिरी। आ एह में सभे ई साँच भुला देला कि बाजार में दू गो गोल होला – एगो बेचे वालन के आ दुसरका खरीदे वालन के। भुला दिहिलें हम सभ कि ‘हारेगा जब कोई बाजी तभी तो होगी किसी की जीत ! दोस्त यही दुनिया की रीत, तुझे मुबारक तेरा मीत!’

अधिकतर वणिकन के शिकायत होखेला कि बाजार उनुका के लूटे ला लागल रहेला। उनुकर रणनीति के काट ले के बइठल बा, उनुकर सगरी इंडिकेटर – संकेतक – बेकार क देत बा। बाकिर असल बात भुला देला कि हर वणिक के सबले बड़का दुश्मन ऊ स्वयं होला। ऊ आपने बनावल रणनीति पर टिक ना पावे, आपने चुनल संकेतक के संकेत माने-सुने से इन्कार कर देला। भुला जाला कि वणिक अक्सरहांं अपने साथे दुश्मनी निबाहत रहेला। जब ओकर बेचे के चाहीं तब खरीद लेला, आ जब खरीदे के मौका आवेला त बेच देला। आपने बनावल रणनीति के पालन ना करे। भईया, अइसन कवनो रणनीति, कवनो संकेतक होईए ना सके जवन कबो नुकसान ना करावे। हर रणनीति, हर संकेतक के समय-कुसमय गलत होखे के अनेसा हमेशा होला। राउर काम बस अतने होला कि आपने बनावल रणनीति, आपने चुनल संकेतक पर भरोसा करीं आ ओकरे हिसाब से वणिकई कइल करीं।

ई बात जाने-माने में हमरा नाहियो त तीस बरीस लाग गइल। पता ना कतना सौ रणनीति पर चल के देखनी, कतना हजार संकेतक के इस्तेमाल कर के देखनी। जइसन कि हर रणनिति के सुभाव होला कि ऊ समय-कुसमय गलत होखबे करी आ हम हर बेर आपन रणनीति बदल लेत रहीं, नया-नया संकेतक के इस्तेमाल शुरु कर दीं। कुछेक सौदा सही होखे त उछाहे पगला जाईं आ जसहीं दाँव गलत पड़ जाव त अपना करम के, बाजार के, तरह-तरह के इन्फ्लुएंसरन के दोष देबे लागीं। हम ना त प्रशिक्षित सलाहकार हँई ना विश्लेषक बाकिर कवनो सलाहकार भा विश्लेषक का लगे जाए के सोचबो ना कइनी। आपन बुद्धि आ दोसरा के पईसा सभका बेसी बुझाला, आ हमहूं एही रोग के मरीज हँई. बाकिर अपना कई युग के अनुभव का आधार पर हम इहे कह सकिलें कि अगर वणिकई करे के बा त एगो बाजार, एगो आइटम, एगो टाइमफ्रेम, एगो रणनीति, एगो संकेतक चुन लीं आ ओकरा से तनिको दाँए-बाँए होखे के सोचबो मत करीं।

रउरा हाथ मेंं बस नुकसान के सीमा बा, मुनाफा रउरा बस के बात ना होखे। बाकिर नुकसान तय कइला का साथही रउरा आपन मुनाफो तय कर लेबे के चाहीं। ना त ‘जस जस सुरसा बदन बढ़ावा, तासु दून कपि रूप देखावा’ के फेर में पड़हीं के बा। मिलत मुनाफा पर संतोष ना होखी, जस-जस मुनाफा बड़ी तस-तस राउर लालच बढ़त जाई आ जबले होश आई तबले ‘सत जोजन तेहिं आनन कीन्हा, अति लघु रूप पवनसुत लीन्हा’ वाला हालत हो जाई आ सगरी मुनाफा बिला जाई भा हो सकेला कि तबले नुकसानो के हालत बन जाव।

वाणिकी खातिर सबले बढ़िया आइटम बैंक निफ्टी के आप्शन होखेला काहे कि एकरा में लिक्विडटी का साथही वोलेटिलिटिओ होला। ( Liquidity and Volatility)। रउरा बस अतने करे के बा कि एगो लॉट से सौदा कइल करीं आ पहिलहीं से तय कर लीं कि कतना नुकसान बरदाश्त करे के बा आ कतना मुनाफा होखे त ले के निकल जाए के बा। तिनतसिया वालन के फेरा में पड़ब त तब ले ना निकल पाएब जब ले सगरी पॉकिट खाली ना हो जाई। बैंक निफ्टी के एक लॉट बीस लाख रुपिया के होला भलही रउरा ऊ लॉट पाँच हजार में किनले होखीं भा साठ हजार में। मुनाफा आ नुकसान ओही बीस लाख का आधार पर होखल करेला। तनिको चढ़ल त छप्पर फाड़ मुनाफा आ तनिको गिरल त .. ाँड़ फाड़ नुकसान! कटहर के कोवा तू खइबऽ त ई मोटकी मुगरिया के खाई!

अपना औकात में रहे के आदत डालींं आ बेंवत का बहकावा में मत आईं। नुकसान ओतने भर के होखे कि काल्हु बाजार में फेर आ सकीं, आ मुनाफो अतना कि आवाजाही बनल रहो! जानकारन के कहना होला कि अपना कुल पूंजी (सौदा पर लगावल राशि ना) के एक फीसदी से बेसी के नुकसान एक सौदा में ना हो पावे आ कुल पूंजी के दू फीसदी मुनाफा मिल जाव त ले के निकल लीं। हमहूं जानत बानी कि कहल आसान होला, मानल ना! बाकिर अगर ई कहलका मान लिहनी त रउरे फायदा में रहब! अब रउरा सोचीं कि का करे के बा।

आ चलत चलत इहो बतावत चलीं कि आजु वाणिकी के चरचा एही चलते कइनी कि बाजार युद्ध के अनेसा से घबराइल रहुवे बाकिर ओतना ना गिरल जतना गिरे के चाहत रहुवे आ उपरी बेरा में फेरु उछाल मार लिहलसि जवना के उमेदो ना रहल। कई बेर अनुमान से बेसी गिरावट हो जाई आ उमेद का बावजूद कवनो उछाल देखे – जवना के डेट कैट बाउन्स, मुअल बिलाई के उछाल कहल जाला – के ना मिली। के जानत बा कि आज के उछाल शायद इहे डेड कैट बाउन्स रहुवे आ परसों फेर उहे गिरावट देखे के मिल जाव जवना के अनेसा अबहियों मौजूद बा।

तब ले जम के होली मनाईं। कादोंं-कीच, रंग-गुलाल से परेहज मत करीं बाकिर धेयान रहे कि सूते से पहिले सगरी रंग-गुलाल धोवा जाव। ठीक वइसहीं जइसे कि हर वणिक के आपन सौदा ले के सूते ना जाए के चाहीं। के जानत बा कि काल्हु का होखी! जवन मिल गइल तवन राउर रहुवे, जवन चल गइल तवन राउर ना रहल।

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