बताव आ बतावऽ के अन्तर – कॉपी एडिटर के मुसीबत

– टीम अंजोरिया

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बताव आ बतावऽ के अन्तर – कॉपी एडिटर के मुसीबत

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अकबर बीरबल के कहानियन में शामिल एगो कहानी इहो हवे जवना में अकबर अपना दरबार के नवरत्नन में शामिल बीरबल के आदेश दिहलन कि –
बीरबल लाओ ऐसा नर,पीर बावर्ची भिश्ती खर
आ बीरबल एगो पंडित जी के ले आके खड़ा कर दिहलन।

दुनिया में भोजपुरी के पहिलका वेबसाइट चलावे का फेर में कतना पापड़ बेले के पड़ल आ अबहियों बेले के पड़त बा ओकर हिसाब ना कइल जा सके। तीस पैंतीस करोड़ लोगन के भाषा होखला का बावजूद भोजपुरी के वेबसाइट देखे वाला अंगूरी पर गिना सकेलें। एक त हमार टेढ़ बोले के आदत आ ओहपर से संसाधन के कमी अपना समर्पण से तोपला का कोशिश में हमार जवन हाल हो गइल बा तवन बतावलो ना बता पाएब.

भोजपुरी में विद्वानन के कमी नइखे। लिखनिहारो सैकड़न बाड़न। बाकिर आजु ले ई लोग एगो मानक भोजपुरी बनावे ला तईयार ना भईल। मजबूरन अंजोरिया के एगो आपन शैली बनावे के मजबूरी हो गइल। कोशिश करेनी कि अंजोरिया के शैली सहज आ एकरूप हो सके। प्रतिष्ठित लिखनिहारो के लिखलका में जहाँ तहाँ कुछ फेर-बदल करे के पड़ जाला। ऊ लोग के बड़प्पन मानींं कि ऊ लोग हमरा एह फेर-बदल से असहमत होखला का बावजूद नाराज ना होखे। हँ एकाध गो छुटभैया लिखनिहार जरुरे मिललन जिनका एह पर आपत्ति रहल कि उनुका लिखलका में फेर-बदल करे वाला हम के हईं! आ अइसनका लोग ओकरा बाद दुबारा ना आइल। भा कहीं कि हम उनुका के दुबारा अपना दुआरी बइठे के मौके ना दिहनी।

कवनो प्रकाशन में लिखनिहार के लिखलका अइला का बाद कई तरह के लोगन का सोझा से गुजरे पड़ेला। पुरनका जमना में हाथ से लिखल भा स्कैन कर के खींचल फोटो मिलत रहुवे। तब ओकरा के टाइपिस्ट से टाइप करवावल जाव। फेर ओकरा के प्रूफ रीडर देखसु आ जहाँ कवनो गलती भा सुधार के गुंजाइश बुझाव तहाँ कॉपी एडिटर ओह में सुधार कर देत रहलें। अइसनका लोगन के कुछ संस्थानन में सब-एडिटर कहल जाला। सब-एडिटर सामग्री के गुणवत्ता ना देखे। ऊ बस अतने कइल चाहेला कि एहमे वर्तनी भा व्याकरण भा संदर्भ के कमी मत होखे। एहसे ऊपर होलें सम्पादक लोग। सम्पादक लोग कवनो सामग्री के गुणवत्ता तय करेलें, कवना तरह के सामग्री कवना जगहा प्रकाशित होखो ई तय करेलें। आ कई जगहा एहू से ऊपर होलें मैनेजिंग एडिटर। ई लोग ई देखेला कि कवना सामग्री के प्रकाशन से प्रकाशन के व्यावसायिक हित साधल जा सकेला। आ ई सब-कुछ मिला दीं त बन जाला प्रकाशक-सम्पादक। अकबर का भाषा में – पीर बावर्ची भिश्ती खर!

अब रउरा सोचत होखब कि अतना देर ले ई मरदा कपार खा लिहलसि बाकिर अबहीं ले ई पता ना लागल कि काहें! त अब आवत बानी असल मुद्दा पर।

भोजपुरी में एगो सबले बड़हन खासियत होला कि ई लिखलका से कम बोललका से अधिका बूझल जाला। जइसे उर्दू का बारे में कहल जाला कि नुक्ता का फेर से खुदा जुदा हो जालें। वइसहीं भोजपुरी में ‘ऽ’ का कमी से निहोरा भा निर्देश आदेश बन जाला। साँच कहीं त अनुरोध, निर्देश, आ आदेश ले के एगो बतकुच्चन लिखल जा सकत रहुवे। बाकिर एकरा के हम बतकुच्चन का सीमित दायरा में डालल ना चहनी आ पूरा लेख बना दिहनी।

तूं बताव आ तूं बतावऽ आ रउरे बताईंं के महीन अन्तर अर्थ के अनर्थ में बदले के ताकत राखेला। अनुरोध अपना से बड़का से भा अपना बरोबरी वाला से कइल जाला। चल यार संगही चलल जाव! चलऽ भईया संगही चलल जाव! आ चल हमरा साथे! तीनो वाक्य में बहुते कुछ के अन्तर बा। हँ चल यार आ चलऽ यार दुनू कहल जा सकेला। अगर दोस्त बहुत करीबी होखो त ओकरा के चल आ चलऽ दुनू कहल जा सकेला। बाकिर अगर औपचारिक दोस्ती होखो त चलऽ कहे के पड़ी। आ अगर सामने वाला आदमी रउरा से पद में भा बेंवत में भा औकात में बेसी होखो त चलऽ तबहियें कहल जा सकेला जब ऊ बड़ त होखसु बाकिर अपनापन वाला। ना त चलीं कहे के पड़ी।

भोजपुरी में एह अवग्रह चिह्न ‘ऽ’ के व्यवहार कई जगहा बहुते जरुरी हो जाला। एकरा बिना सही अर्थ भा भाव ना आ सकी ओह लेख में। कई बेर एकर व्यवहार कुछ अधिके कर देबे ला लोग आ कई बेर जहां जरुरी होला तहँवो ना करे लोग। अंजोरिया के शैली में लिखल जाव त अगर एह अवग्रह चिह्न ‘ऽ’ का कमी से अगर सही भाव भा अर्थ ना आवत होखो त जरुरे लगावे के चाहीं। बाकिर जहाँ एकरा बिना काम चल जाव, अर्थ के अनर्थ होखे के अनेसा ना होखे ओहिजा एकरा के नाहियो डालल जा सकेला।

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