– टीम अंजोरिया
#डॉ-रामरक्षा-मिश्र-विमल #भोजपुरी-गीत-गवनई #आकाश-राज #यूट्यूब #मनमितवा-आ-जईह
मनमितवा आ जईह
calling one’s beloved

बहुते श्लील भोजपुरिया लोग के शिकायत रहेला कि भोजपुरी गीत गवनई में फूहड़पन आ दूअर्थी संवादन के अधिकता रहेला। अब रउरा दू भा अधिका अर्थ निकालल चाहीं त करीब करीब हर बात के दू गो भा बेसी अर्थ निकालल जा सकेला। इहां ले कि कवनो अकेला शब्दो के कई गो अर्थ शब्दकोशन में मिल जाला। अनेकार्थी शब्द त बाकायदा रटावल जाला विद्यालयन के नवही विद्यार्थियन के।
खैर छोड़ीं ई सभ। हम त हमेशा भोजपुरी गीत-गवनई, वीडियो वगैरह देखत रहेनी। कई बार अपना मनरंजन खातिर त कई बार एह तलाश में कि कतहीं कुछ नीमन मिल जाव त रउरो सभ से साझा कर दीं। आजु फेर अइसने एगो रोमांटिक भोजपुरी गीत मिल गइल यूट्यूब का आकाश राज आफिसियल चैनल पर। ई गीत रउरा सभे के जानल पहिचानल लिखनिहार रामरक्षा मिश्र विमल जी के रचल ह। संगीत से सजवले बाड़न मनोज कुमार चौबे आ आकाश राज। गीत गवलो बाड़न आकाशे राज।
पहिले ई गीत सुन लीं सभे –
अब जब गीत सुन लिहनी त एह गीत के तीनो अन्तरो परोस देत बानी। हालांकि ई गीत चार अन्तरा में लिखले रहलन विमल जी बाकिर गवनई में चउथा अन्तरा फिट ना बइठल होखी से ओकरा के छोड़ दिहल गइल बा। नीचे गीत के चारो अन्तरा दे देले बानी।

मनमितवा आ जइहऽ
– डाॅ. रामरक्षा मिश्र विमल
मनमितवा आ जइहऽ
रहि-रहि हियरा में उठेला उफान
पानी बिना मछरी नियन बा परान।
भरली जवानी काहें लोर में नहाइल ?
तोहरा बेगर मन ना अगराइल, ना मदमाइल
सजनी के दिल बहला जइहऽ
रहे दीहऽ बनले उमिरि के उठान !अइबऽ त सधिया के सेजिया सजाइब
मन के पँजरवा सजनवा सुताइब, जियरा जुड़ाइब
सँचल सपनवा बचा जइहऽ
नेहिया में रातो दिन होई नहान।एक मन करे अपना गोदिया सुतइतीं
एक मन करे अँकवरिया लगइतीं, खुशी में समइतीं।
तरसत जियरवा जुड़ा जइहऽ
होखे दीहऽ दूनो देहिंया एक ही परान।विमल कलिंगपोङ चलिके घुमइहऽ
बदरी-पहाड़ के सँघतिया बनइहऽ, सरग देखइहऽ
कंचनजंगा देखा जइहऽ
जिनिगी में सुख के करइह नेवान।
यूट्यूब पर जारी एह गीत के सबले बड़का खासियत बा कि एकरा साथे कवनो वीडियो नइखे जोड़ल गइल। एह से हो सकेला कि बहुते लोग एकरा के बाईपास करत आकाश राज के अउरिओ गीत बा़ड़ी सँ एही चैनल में, ओहनी के सुने देखे चल जइहें। आम भोजपुरिहा के कानो ना आँखो के आनन्द चाहल होला.
यूट्यूब पर मौजूदा अधिका गीतन के वीडियो ओही श्रेणी के हई सँ जवना के आम भोजपुरिहा भा कहीं त अश्लील भोजजपुरिहा पसन्द करेलें। हमहूं भरसक एही श्रेणी के लोग ला लिखे के कोशिश करेनी। विद्वान लोग खातिर ना। आ हम आम आदमी हईं श्लील आदमी ना एहू चलते। श्लील विद्वान लोग त दुनिया में भोजपुरी के पहिलका वेबसाइट अंजोरिया डॉटकॉम के देखहूं ना आवसु। जबकि ओहमें से बहते लोगन के लिखलका एहिजा मौजूद बा। अधिकतर लिखनिहार अपने लिखलका पढ़ के रह जालें दोसरा के लिखलका पढ़े ला पन्ना ना पलटसु।
हम अधिकतर के बात कइले बानी। कुछ स्नेही विद्वानन के नेह छोह अंजोरिया के हमेशा से मिलत आइल बा बाकिर वइसनका विद्वान गिनले चुनल बाड़न। कुछ परिचित विद्वान लिखनिहार त निहोरा कइलो पर कुछ लिख के ना भेजसु, ठीक वइसहीं जइसे रउरो सभे एकाध लाइन के टिप्पणी लिखे में महटिया जानी। शायद रउरा लाज लागत होखी कि लोग जान मत जाव कि रउरो अंजोरिया देखे-पढ़े आइलें। आवत रहीं। टिप्पणी लिखे के बात त एहसे करेनी कि कुछ थाह लागो कि रउरा सभे के ई परोसा कइसन लागल ताकि आगे से हम वइसन रचनन पर विशेष ध्यान दे सकीं जवना के रउरा पसन्द करीं।

0 Comments