क नवाँ मुँह फेरमफेरी

– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

#भोजपुरिया चिट्ठी #भोजपुरी-पहाड़ा #डॉ-रामरक्षा-मिश्र-विमल

सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-36

आइल भोजपुरिया चिट्ठी

क नवाँ मुँह फेरमफेरी

multiplication table in bhojpuri

आजु काकी के मन ना लागत रहे। छोटका नतिया के ‘टू टुजा फोर’ सुनि-सुनिके उनुकर कान पाकि गइल रहे। क बेरि कहली कि भितरी जा सन, ओहिजे रटिहऽ सन, तनी हमरा के सूते द सन बाकिर कवनो ऊठे के नाँवे ना लेत रहन स। तले रामसिङार लउकि गइले। कहली कि छवरी ओरि जइह त तनी लभेरन के कहि दिह कि काकी बोलवली हा। थोरहीं देर में लभेरन आ गइले। काकी के त जइसे जान में जान आइल। लभेरन कहले कि ई कइसन पहाड़ा ह? भोजपुरी में पढ़ऽ लोग, जल्दी यादि हो जाई। दू दूनी चार…दु नवा अठारह।

काकी के छोटका नतिया टुकुर-टुकुर मुँह ताकत रहे। तले बड़का के जिग्यासा बढ़लि- अंकल, आपलोग ऐसे ही पढ़ते थे? लभेरन बतवले कि पहाड़ा रटल हमनी खातिर कतना आसान रहे। हमनी का टाइम में छुट्टी से आधा घंटा पहिले प्राइमरी के सभ बच्चा एक जगह खड़ा हो जइहें सन आ पहिले सइ तक के गिनती आ फेरु तीस तक के पहाड़ा एक साथ पढ़त रहन स। नतिया कहलसि कि आपलोग अंग्रेजी में नहीं न पढ़ते थे, इसीलिए तोड़-मरोड़ के पढ़ते थे। लभेरन कहले कि बिना तोड़-मरोर के पहाड़ा होइबे ना करी। मुख-सुख खातिर अतना करहीं के परेला। अब तूँही बतावऽ, तोहार छोट भाई तबे ले नधले बाड़े- ‘टू टुजा फोर’, ऊ का ह? असल में कहाला- Two twos are four आ ऊहे रगड़ात-रगड़ात हो जाला- Two twos-za four. हमनी के त ककहरा से पहाड़ा तक एक किसिम के खेले रहल हा। खेलते-खेलत हमनी का कब काम भरि हिसाब-किताब करे सीखि गइलीं जा, बुझइबे ना कइल।

अब काकी चुप रहली आ नतिये बोले शुरू कइलसि- अंकल, आपलोग कैसे हिंदी का एबीसीडी पढ़ते थे, बताइए ना!

लभेरन बोलले- हमनी का त बड़ा आसानी से बोलि लेत रहलीं जा, बाकिर हमनी के पुरनिया लोग के ककहरा आ पहाड़ा बहुत कठिन होत रहे। क ए क, क आकार का, क हरसइ कि, क दिरघई की, क हरसउ कु, क दिरघऊ कू, क एकार के, क ऐकार कै, क ओकार को, क औकार कौ, कंसारे कं, क विसर्गे कः। ई पढल आ समुझल हमनी खातिर का, केहूँ खातिर आसान बा बाकिर हमनी के बाबा जवन पढ़ले रहन, ऊ बहुत कठिन रहे।

अब तक दूनो भाई नीमन श्रोता नियन बइठि गइल रहन स। इशारा पवते फेरु बोले शुरू कइले लभेरन। ऊ कहले कि ओह घरी हइसे ककहरा पढ़ावल जात रहे-

क ए क, कानुन का, हरसिन कि, दिरघन की, तारकुन कु, बारजुन कू, एकमति के, डोले कै, करमत को, दुरुमचन्ना कौ, मास्ते कं, दुरवासी कः।

बड़का बोललसि- इसका मीनिंग क्या है, समझ में नहीं आया।

तब लभेरन समुझावे लगले- क ए क त बुझते बाड़ लोग? ऊ माथा हिलवले सन। त फेरु कहले- ‘कानुन का’ आकार खातिर होला। ‘काना’ माने खड़ी पाई। हरसिन कि माने ह्रस्व इ। नतिया टोकलसि- छोटी इ न ? लभेरन कहले केनियो से नपबऽ लोग त दूनो इ बराबरे लगिहें स, एमें छोट-बड़ ना होखे। दिरघन की माने दीर्घ ई। ‘तारकुन कु’ माने ह्रस्व उ। ‘तारकुन’ माने तार नीयर नीचे लटकल। ‘बारजुन कू’ दीर्घ ‘ऊ’ खातिर कहल गइल बा। जुन माने पोंछि। त दीर्घ ‘ऊ’ में बड़हन पोंछि लउकेले नू?

तब छोटका टुभुकलसि- सही में बहुत कठिन है अंकल!

बड़का एक हाथ ठुड्डी का नीचे रखले रहे आ एक हाथ से कंटिनिऊ करे के इशारा कइलसि। लभेरन फेरु बोले लगले- ‘एकमति के’ ए मात्रा खातिर। एकरा माथा माने शिरोरेखा पर एक मात्रा होले। ‘डोले कै’ माने ए के मात्रा दू गो। एहिजा ‘दो’ के ‘डो’ हो गइल बा आ ‘ए’ खातिर ‘ले’ कहिके एगो खूबसूरत चित्र प्रस्तुत कइल गइल बा यादि राखे खातिर।

अब तक दूनो नतियन के मन लागि गइल रहे। काकियो बाड़ा ध्यान से चुपचाप सुनत रहली। लभेरन आगा बढ़ले- ‘करमत को’ ‘ओ’ का मात्रा खातिर हटे। करमत माने एगो काना (खड़ा) पाई आ एगो ऊपर के मात्रा। ‘दुरुमचन्ना कौ’ ‘औ’ का मात्रा खातिर हटे। ‘दुरुम’ माने दू आ ‘चन्ना’ माने चिन्ह। अस मन समुझऽ लोग कि एहमें एगो खड़ी पाई आ ऊपर दू गो मात्रा वाला चिन्ह होले। ‘मास्ते कं’ अनुस्वार खातिर होला। ‘मास्ते’ माने मस्तक पर बिंदु। ‘दुरवासी कः’ विसर्ग खातिर होला। ‘दुरवासी’ माने दू गो बिंदु के वास माने बगल में बइठल दू गो बिंदु।

अब तक लइका पसेना-पसेना हो गइल रहन स। बड़का सवाल कइलसि- खेल-खेल में कैसे पढ़ते थे?

लभेरन कहले- हमनी का आपस में पूछत रहीं जा- क नवाँ मुँह फेरमफेरी? त जबाब मिलत रहे- चार नवाँ मुँह फेरमफेरी (३६)। फेरु पूछीं जा- क नवाँ मुँह जुट्टम जुट्टी त जबाब मिलत रहे- सात नवाँ मुँह जुट्टम जुट्टी (‌‌६३)। जानतारऽ लोग, हमनी का समय में केहूँ ढेर देर तक रूसल ना रहत रहे, तीन तक गिनत गिनत में दोस्ती हो जात रहे। 4 पर रूसल 7 तक जात-जात मानि जात रहे।

अब जाके छोटका नतिया पुछलसि- “मुँह जुट्टम जुट्टी माने किस करना?” काकी बोलली- “हँ, अब ईहे नु बाँचल रहल हा?”

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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28</e
पो. – मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030

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