अश्लीलता से बेसी अश्लील
more vulgar than vulgarity

दुनिया में भोजपुरी में शुरु होखे वाला पहिलका वेबसाइट – anjoria.com – का बारे में जवन छवि रउरा मन में बा हम ओकरो ले बेसी हईं। बहुते लोगन के ई बात पसन्द ना आवे कि हम भोजपुरी में अश्लीलता के बढ़ावा काहे देनी, ओकरा के सही काहे बतावेनी। त हमरा ओह लोग के सोचला से कवनो मतलब नइखे। जवन मन करे तवन सोचीं, हमरा जवन सही लागी तवन हम बतियाएब।
हमार कोशिश रहेला कि दुनिया में, देश में, अपना प्रान्त में, अपना समाज में जवने कुछ चरचा में होखे तवना के सहज भाव से आसान शब्दावली में अपना ‘अश्लील’ पाठकन ला परोस दीं। श्लील पाठक एहिजा आवसु ना काहे कि ओह लोग के भोजपुरी आम लोग वाला भोजपुरी ना होखे, आ हम वइसनका श्लील पाठकन के परवाहो ना करीं।
मथैला ले के अतना देर माथ खइला का बाद चलीं असल मुद्दा के चरचा कइल जाव। एगो हिन्दी फिलिम के गीत के कुछ बोल हवे –
हंगामा है क्यों बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है,
डाका तो नहीं डाला, चोरी तो नहीं की है।
काल्हु हजाम गिन दी कि माथा पर कतना बार रहुवे। काल्हु विधानसभा चुनाव 2026 के मतगणना होखे जा रहल बा आ चौबीस घंटा का भितरे असल परिणाम सभका सोझा आ जाई। बाकिर तबले पूर्वानुमान लगावे ला एक्जिट पोल के चरचा जारी बा। अइसने एगो पोलस्टर एक्सिस माई इण्डिया का तरफ से ओकर सर्वसर्वा प्रदीप गुप्ता एलान कर दिहले बाड़न कि उनुकर कंपनी पश्चिम बंगाल के चुनाव के पूर्वानुमान जारी ना करी। आ एह एलान का साथही ऊ सही बातो कह दिहले बाड़न कि सत्तर फीसदी से बेसी लोग कुछ बोले ला तइयार ना मिलल। एही चलते ऊ आपन एक्जिट पोल के परिणाम नइखन बतावत।
एक तरह से कहीं त प्रदीप जी आपन पूर्वानुमान बता दिहलन। अरधो कहे त सरबो बूझे, सरबो कहे त बरधो बूझे! समझदार आदमी अधवो कहला पर जान जाला कि का कहाता ना त बैल त पूरा कहलो पर ना बूझ पावे। रउरे सोचीं कि अगर पचहत्तर प्रतिशत लोग मुँह खोलेला तइयार नइखे त ओकर कारण का बा! माने कि ई पचहत्तर फीसदी लोग मौजूदा व्यवस्था से अतना डेराइल बा कि सचाई नइखे बोल पावत। त जब कोना में जा के ईवीएम के बटन दबावे के होखी त ऊ केकर बटन दबाई! आ एही से रउरा असल जबाब मिल जाए के चाहत रहल।
अब प्रदीप गुप्ता के कंपनी एक्सिस माई इण्डिया कवनो सार्वजनिक कंपनी त हवे ना। पब्लिक के पइसा पर चले ना। त ओकरा पर कवनो बाध्यता नइखे कि ऊ रउरा हर सवाल के जबाब देव। पिछला कई बरीसन से चुनाव परिणाम के पूर्वानुमान लगावत-बतावत ई कंपनी एगो नाम कमा लिहले बिया। ओकर एगो सम्मान वाला छवि बन गइल बा आम जनमानस में। हो सकेला कि ऊ अपना एह छवि पर कवनो दाग ना लागे दीहल चाहत होखसु। हो सकेला कि उनुकर परिणाम तृणमूल का पक्ष में होखो आ जब देखलन कि बयार उलुटा बह रहल बा त ओनिऐ पीठ कर दिहलन। मान लीं कि ऊ बता देतन कि तृणमूल जीते जा रहल बिया आ परिणाम उलुटा आ जाई त कतना बदनामी होखी उनुका कंपनी के!
आ जे ऊ भाजपा के जीते के अनुमान देखले होखसु त उनुकर पुर्वानुमान खरीदे वाली, वित्त पोषित करे वाली कंपनी के का होखी! भई गति साँप छछून्दर की री, उगलत आन्हर निगलत कोढ़ी!
एक त हिन्दुस्तान के कवनो पोलस्टर आपन तौर तरीका, सवाल, आंकड़ा के सभका सोझा ना करसु। सभका डर लागेला कि कहीं कोकाकोला के रहस्यमयी रसायन के भेद मत खुल जाव। दोसरे सभे के एहिजे रहे के बा आ समुन्दर में रहि के घड़ियाल से रार काहें बेसावे कवनो कंपनी ? दोसरे हर पोलस्टर के गाहक अपना हिसाब से जानकारी चाहेला आ पोलस्टरन के कोशिश होला कि आपन इज्जत बचावत चुम्मा चाटिए ले एह रिश्ता के बनवले राखसु। हम बिस्तर हो गइला पर भाव घट जाई भा दोसर गाहक आवे से भागे लागी।
दुनिया के प्रतिष्ठित पोलस्टर जइसे कि Pew, आ Gallup आपन सगरी सामग्री पारदर्शी तरीका से साझा कर देलें। आपन तौर-तरीका, पूरा सवाल शब्दश:, जिनका से सवाल पूछाइल उनुकर चयन कइसे कइल गइल, कतना लोग से सवाल कइल गइल, सवालन के क्रम का रहुवे, कवना तारीख के, कवना भाषा में, फोन से भा आमने-सामने, वगैरह-वगैरह सभ कुछ बता देलें। आपन आंकड़ा सभका सोझा राख देलें। केहू चाहे ओह आंकड़ा के अपना तरीका से विश्लेषित कर सकेला। ई सभ एहला कि ई पोलस्टर शोध संस्थान हईं सँ। वैज्ञानिक शोध के परिणाम दोहरावे जोग होखे के चाहीं। बाकिर हमहन के पोलस्टर आपन कंपनी चलावेलें, आपन मुनाफा देखेलें, गाहक का हिसाब से आपन जोगाड़ लगावेलें। अलग बाति बा कि एहू लोग के अधिकतर बेर सही होखल जरुरी होला। एह लोग के अनुमान हमेशा हवा का हिसाब से होला। अगर अइसन ना होखीत त बंगला पोलस्टर के अनुमानन आ हिन्दी-अंग्रेजी वाला पोलस्टरन के अनुमान में अइसन आ अतना फरक ना आइत। बांगला पोलस्टर ममता के जीत देखावत बाड़न। आ ई एहू चलते हो सकेला कि उहो एक्सिस माई इण्डिया का तरह डेराइल होखसु।
अतना चरचा एही चलते कइनी कि राउर अंजोरिया चूमे चाटी, रिमोट से लहंगा उठवले तक सीमित ना रहेला। गंभीर विषयन पर गंभीर सोचो से चरचा करेला। अगर भोजपुरी के कवनो दोसर साइट कवनो चैनल एह तरह के चरचा करत होखसु त हमरो के बताईं। हमरा बहुते खुशी होखी। अंजोरिया के कोशिश इहे रहेला कि भोजपुरी के गीते-गवनई, सिनेमे-नौटंकी, किस्से-कहानी, कविते-दोहा, खेते-खरिहानी ले बान्हि के ना राखल जाव।
रउरा आपन राय बताएब ना, जानत बानी। बाकिर निहोरा कइला से हमहूं भागब ना। रउरा हमार खरचा त चलावत नइखीं। हमहूं एक्सिस माई इण्डिया का तरह स्वतंत्र बानी कि जवन मन करी तवन बताएब, जवन मन ना करी त ना बताएब। रउरा खुश भइला भा नाराजगी के परवाह नइखे हमरा। हँ अगर रउरा आपन टीका-टिप्पणी लिखल शुरु कर दीं त हो सकेला कि हमहूं रउरा बात के मान कइल शुरु कर दीं। हो सकेला का?


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