जरुरत बा कई गो गोपाल पाठा के
- टीम अंजोरिया

जरुरत बा कई गो गोपाल पाठा के
looking-for-a-Gopal-Patha

अधिका उमेद त इहे बा कि रउरा सोचे लागीं कि ई गोपाल पाठा के ह ? आ आजु अचानके उनुकर जरुरत काहे बुझाए लागल?

त आगे पढ़त जाईं रउरा हर सवाल के जबाब मिल जाई एह लेख में जवन हम पश्चिम बंगाल चुनाव के मतगणना का दू दिन पहिले लिखे बइठल बानी। एक्जिट पोल के बहुमत त इहे कहत बा कि बंगाल में भाजपा आ रहल बिया। भगवान करसु कि अइसने होखो। ना त कहीं ममता के शब्दन में ‘वही होता है जो मंजूरे खुदा होता है’ हो जाव तब जवन आफत बंगाल के हिन्दूवन पर आई तवन शायद 1946 के डायरेक्ट एक्शन डे ओ से वीभत्स होखी। ई हमार अनेसा बा। ममता हारस भा जीतस, खरबूजा छूरी पर गिरे भा छूरी खरबूजा पर कटाई खरबूजे !

आ ओही डायरेक्ट एक्शन डे के याद कर के श्रद्धेय पूजनीय गोपाल पाठा जी याद आ गइलन. गोपाल पाठा जी के पूरा नाम रहल गोपाल चन्द्र मुखर्जी आ ऊ पाठा बेचे का बिजनेस मेंं रहलन। बंगाल में पाठा खस्सी (बकरी के बच्चा) के कहल जाला आ एही चलते उनुका के सभे गोपाल पाठा का नाम से जानत रहुवे।

16 अगस्त 1946 का दिने देश विभाजन के मांग पर बल देबे खातिर मुस्लिम लीग का तरफ से कलकत्ता ( आजु के कोलकाता) आ ओकरा आस पास का इलाका में जवन अत्याचार भइल तवना में हजारन हिन्दूवन के ‘सिर तन से जुदा’ हो गइल। वइसन आपदा का घड़ी में गोपाल पाठा जी खड़ा भइलन आ हिन्दू समाज के लोगन के अपना साथे ले के एह कत्लो गैरत के मुकाबला कइलन।

आ दुर्भाग्य बा कि कृतघ्न हिन्दू समाज अपना एह नायक के भुला दिहलसि। जवन सम्मान आ पहचान एह महान विभूति के मिलल चाहत रहल तवना से गोपाल पाठा जी के वंचित कर दिहलसि। बहुते कम हिन्दू होखीहें जिनका गोपाल पाठा जी के नाम इयाद होखी आ उनुकर काम के जानकारी होखी।

दू दिन बाद बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के मतगणना होखे वाला बा। एहमें अधिका उमेद इहे बा कि भाजपा के शानदार जीत मिले वाला बा। बाकिर भाजपा जीतो भा हारो बंगाल के हिन्दूवन पर आफत के बदरी घुरिया रहल बा। जवन होखी तवना का आगा 2021 विधान सभा चुनाव का बाद भइल हिंसा के ताण्डव छोट पड़ जाई। तृणमूल हारो भा जीतो दुनु हालत में बंगाल में हिंसा के बवण्डर उठहीं के बा। आ एकर संकेत दोसर केहू ना खुद ममते दे चुकल बाड़ी कि जान के बाजी लगा दीहल जाई। अभिषेक बनर्जी के चुनौती त रउरो सभे सुनलहीं होखब कि अगर अमित शाह अपना असली बाप के बेटा होखीहन त चार तारीख के रात बंगाल में रहि के देखा दीहन।

आ एही अनेसा से आजु हम गोपाल पाठा जी के नमन करत बानी आ उनुका के इयाद करत खोजत बानी कि बंंगाल में ओह दिन के आ कतना लोग गोपाल पाठा जी वाला जिम्मेवारी उठाई ?

बंगाल के चुनाव भारत के चुनावी इतिहास में एहसे अनूठा बन गइल बा कि अबकी के चुनाव के फैसला मुसलमानन के वोट से ना हिन्दूवन के वोट से होखे जा रहल बा। अधिकतर मुसलमान कबो भाजपा के वोट ना देसु आ अबकियो नइखन दिहले। तृणमूल के जीत खाली मुसलमानने का वोट से ना होखत रहुवे। उनुका के बहुते हिन्दूवनो वोट देत रहलन। वोट का दिने मुसलमान मुहल्लन में जवना तरह से वोट पड़त रहल तवना के तुलना अबकी का चुनाव में हिन्दू मुहल्लन में पड़ल वोटन से कइल जा सकेला। आ अबकी दलित वोट, पिछड़ा वोट, अगला वोट, ब्राह्मण वोट के चरचा ना होके हिन्दू वोट के चरचा हो रहल बा। मीडिया अबहीं ले कबो हिन्दू वोट के नाम ना लेत रहुवे। ऊपर से अबकी हिन्दूवो मतदाता बड़हन संख्या में आपन वोट डाले निकलल बाड़न। बस अपना के नुकसान चहुँपावहीं वाला के वोट मत दे आइल होखसु।

दू दिन बाद सबकुछ साफ हो जाए वाला बा बाकिर सचेत आ सावधान रहल बहुते जरुरी बा।

 

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