श्रेणी: भाषा

बतकुच्चन – ११५

पिछला कई दिन से अलग अलग गोल आपन आपन गोलबन्दी करावे में लागल बाड़ी सँ. कहीं कवनो गोल के गुल्ला छटक जात बा त कहीं बरिसन से राजनीति का गुल्लक में डालल मेहनत पानी में जात लउकत बा. त हमहुं सोचनी कि काहे ना अबकि गोल, गोली, गोला,...

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आ दुर्रऽऽऽ, हमरा कवन काम बा केहु से कहला के? (बतकुच्चन – ११४)

आ दुर्रऽऽऽ, हमरा कवन काम बा केहु से कहला के? हर गाँव में अइसनका एगो फुआ भा काकी जरूर मिल जइहें जिनकर कामे होला एने के बात ओने चहुँपावल आ गाँव भर के चुहानी घूमल. राजनीति आ मीडियो में अइसनका लोग के कमी ना मिले. ई लोग जवन बात कहे...

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अलबल करे खातिर अलबलाह होखल जरूरी ना होला ( बतकुच्चन – ११३)

सट्टा से अबहींओ टीवी चैनल वइसहीं सटल बाड़ें बाकिर हमरा एक बात समुझ में नइखे आवत कि खेत खइलसि गदहा आ मार खइलसि जोलहा वाला कहाउत एह बात पर काहे सटीक बइठत बा. कइल केहु आ भरी केहु दोसर, से काहे? होखे के त चाहत रहुवे कि आईपीएल के...

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बड़ बड़ भूत कदम तर रोअसु मुआ माँगे पुआ (बतकुच्चन ११२)

सत्ता के सटहा सट्टा के सटाकी साट दिहलसि पोसुआ मीडिया पर. एगो भोजपुरी कहाउत ह कि बड़ बड़ भूत कदम तर रोअसु मुआ माँगे पुआ. बाकिर बड़का भूतन पर से धेयान हटावे खातिर कवनो ना कवनो मुआ के खोज निकाले के पड़िए जाला. पिछला कई दिन से चौबीस...

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बजलऽ ए शंख बाकिर बाबा जी के पदा के (बतकुच्चन – १११)

तीन गो कहाउत आ तीन गो चोर के कहानी. सोचत बानी कि पहिले कहनिए कह सुनाईं छोट क के. एगो गाँव में चोरी भइल, तीन गो चोर पकड़इले. राजा के जमाना रहे राजा का दरबार में पेशी भइल. राजा तीनो के बारे में जानकारी लिहलें. फेर पहिलका से कहलें,...

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