केशव के गजल – 2
– केशव मोहन पाण्डेय 1. ग़ज़ल एतना नीचे ना गिरऽ कि शरम छोड़ द, हार आ जीत के कुछ भरम छोड़ द. वसूल जिनगी के सबके अलग होखेला, ऊ मुहब्बत छोड़ें, तू हरम छोड़ द. दरिया काग़ज़ के कश्ती से डरबे करी, शर्त, अइसन कुछ आपन करम छोड़ द....
Read More– केशव मोहन पाण्डेय 1. ग़ज़ल एतना नीचे ना गिरऽ कि शरम छोड़ द, हार आ जीत के कुछ भरम छोड़ द. वसूल जिनगी के सबके अलग होखेला, ऊ मुहब्बत छोड़ें, तू हरम छोड़ द. दरिया काग़ज़ के कश्ती से डरबे करी, शर्त, अइसन कुछ आपन करम छोड़ द....
Read MorePosted by Editor | Jan 30, 2013 | पुस्तक चर्चा, भाषा, सरोकार |
अधिकतर रचना हिंदी में रहे वाला एह पत्रिका के अबकी के अंक में बिहार आ दिल्ली के राजनीतिक चरचा का अलावे, भोजपुरी गौरव उमाशंकर सिंह के निधन से जुड़ल खबर, छपरे के कोठियाँ नराँव गाँव के समाजसेवी हरिदयालबाबू के निधन पर लेख, दिल्ली के...
Read More– ओमप्रकाश अमृतांशु हम बच्चा हिंदुस्तानी आगे-आगे बढ़ब जा. आगे-आगे बढ़ब जा. पीछे ना मुड़ब जा . पीछे ना मुड़ब जा . उषा के किरणन संग जगना, हर मुश्किल से लड़ना, सिखलीं मस्त पवन से, ना कबो केहू से डरना. हम नन्हा हईं तूफानी. आगे-आगे...
Read More– केशव मोहन पाण्डेय (1) ग़ज़ल खुशहाल जिनगी भी जहर हो जाला। दिल के दुआ जब बेअसर हो जाला।। लाख जतन कइला पर भी मिले ना मंजिल, डगमगात कदम जब कुडगर हो जाला।। सुन्न अंखियन से छलक जाला समुन्दर, हिया में याद के जब कहर हो जाला।।...
Read More– दुर्गा चरण पाण्डेय (१) आपन बिपत साठ साल के भइल उमर बानी परेसान कचहरी से. रोज रोज होला झगड़ा सुतहीं के बेरा मेहरी से. लइका ह त पइसा खातिर मुड़िए पर मेड़राइल बा. साहु जी साइकिल छिन के रखलें, कुबड़ी के खाँसी जोड़िआइल बा. कउआ करे...
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