दू गो गजल
– डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल 1. मन इ जब जब उदास होखेला तोहरे आस-पास होखेला घर धुँआइल बा आँख लहरेला जब भी बुधुआ किताब खोलेला तोहरा के भुला सकबि कइसे आजुओ मन लुका के रो लेला चोर भइलीं भलाई ला...
Read More– डॅा० जयकान्त सिंह ‘जय’ जेठ भाई के निहोरा करऽ जन अनेत नेत, बबुआ सुधारऽ सुनऽ, तूँही ना ई कहऽ काहे होला रोजे रगड़ा । आपन कमालऽ खालऽ, एनहूँ बा उहे हालऽ आर ना डरेड़ फेर, काहे ला ई झगड़ा ।। चूल्हे नू बँटाला कहीं,...
Read Moreचलि गइल छोड़ि कवन देसवा हो बाबू, मिले नाहिं कवनो सनेसवा हो बाबू।। गोदिये से गइल, अवाक् रह गइनीं कवनो ना बस चलल, का का ना कइनी कुहुके करेजवा कलेसवा हो बाबू।। बबुआ तुँ रहल, एह अँखिया के जोति तोहरे ला झरेला, नयनवा से मोती हूक उठे...
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