पइसा के सामने इज्जत के टंशन खतम
– जयंती पांडेय रामचेला आ के बतवले कि अरे, सुनलऽ हऽ बाबा, ओने घनश्याम चाचा के घर में महाभारत...
Read More– जयंती पांडेय रामचेला आ के बतवले कि अरे, सुनलऽ हऽ बाबा, ओने घनश्याम चाचा के घर में महाभारत...
Read More– राज गुप्तसुन्दर सिंह सीतापुर के राजा रहले. सीतापुर राज के एगो रसम-रिवाज रहल कि हर दशहरा पर...
Read MorePosted by Editor | मार्च 30, 2013 | पुस्तक चर्चा, सरोकार |
भोजपुरी पंचायत पत्रिका के अप्रेल अंक प्रकाशित हो गइल बा. एह अंक में चौतरफा फाँस में फसल शीला...
Read More– ओमप्रकाश अमृतांशु कि आरे झुरू -झुरू बहेला फगुनवा , सगुनवा लेइके बा आईल. लाल -पियर शोभेल गगनवा , धरती के चुनरी रंगाईल. {1} आमवा से अमरित टपके , चह-चह चहके चिरइयाँ. महुआ सुगंध में मातल, कुकू -कुकू कुकेले कोइलिया . कि आरे...
Read More– मनोज भावुक हई ना देखs ए सखी फागुन के उत्पात । दिनवो लागे आजकल पिया-मिलन के रात ॥1॥ अमरइया के गंध आ कोयलिया के तान । दइया रे दइया बुला लेइये लीही जान ॥2॥ ठूठों में फूटे कली, अइसन आइल जोश । अब एह आलम में भला, केकरा होई होश...
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