टैग: भोजपुरी

लोक कवि अब गाते नहीं – ९

(दयानंद पाण्डेय के लिखल आ प्रकाशित हिन्दी उपन्यास के भोजपुरी अनुवाद) आठवीं कड़ी में रउरा पढ़ले रहीं कि सम्मानित भइला का बाद जब लोक कवि अपना गाँवे अइलन त उनुकरा स्वागत में लागल औरतन में उनुकर बालसखी राधो रहली. जेकर असल नाम त रहे...

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बतकुच्चन – ११

पिछला हफ्ता गोबर पथार के बात निकलल रहे त अबकी खर पतवार दिमाग में आ गइल बा. खर पतवार का बारे में सोचते दिमाग में खरखर होखे लागल जइसे कि मूंजियानी से गुजरत घरी आवाज निकलेला. अइसने खरखर से संस्कृत के एगो शब्द बनल रहे खर्पर. खर्पर...

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बिहार में रहीले, सिनेमो देखीले….

अगर रउरा बिहार में रहीले, सिनेमो देखीले, भोजपुरी से लगावो बा त काहे ना आपन राय लिख के सगरी लोग के जनाइले कि कवन फिलिम कइसन बनल बिया ? अँजोरिया के फिल्म अध्याय में फिल्म प्रचारकन के लिखल रपट नियमित रुप से छपत रहेला. ओह लोग के...

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ई सब रोग गरीबी के

– डॉ. कमल किशोर सिंह उत्तर टोला बर तर, बईठल चबुतर पर, धनिया ढील हेरवावत रहे, सुबुकत सब सुनावत रहे – कतना दुःख सुनाईं बहिनी ई ना कभी ओराला, आ धमकेला दोसर झट से जसहीं एगो जाला. भादो में भोला के कसहूँ गोडवा गइल छिलाय....

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