टैग: उमेश ओझा

कलयुग

– डॉ॰ उमेशजी ओझा रउरा मानी चाहे ना मानी, बाकिर धोखाघड़ी, ठगी आ एक दोसरा के टॉग खींचे के जमाना में ईमानदारी के मजे मजा बा. रउरा सभे के हमार बात अटपटा लागत होई, हमरा के पागल आ सनकी समझत होखब, कि कलयुग आ भ्रष्टाचार के जुग में...

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भगवान के चटकन

– डॉ॰ उमेशजी ओझा अरे ए रबिन्दरा, आपन दिमाग ठीक राख, जमीन प रहेके सीख, हवा में मत उड़. सब कोर्इ के इजत होला. जोऽ, आ लईकी देख आउ आ बढिया से आपन बेटा सुरेश के बिआह क दे. ढेरी लईकी देखि के छोड़ छाड़ मत कर, भगवान सब देखत बानी....

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औरत आ जुआ

– डॉ॰ उमेशजी ओझा औरत आपन पुरा उमिर अपने-आप के सुहरावे आ सम्हारे में परेशान रहेली. काहे कि हमनी के पुरूष प्रधान देश में औरतन के डेग-डेग प आहत कइल जाला. ई लोग समाज में आर्थिक नजर से अपना पति भा कवनो मरद प निर्भर रहे वाली...

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वीर विशाल

– डॉ॰ उमेशजी ओझा एगो छोटहन गांव में दीपक अपना धर्मपत्नी सुरभी आ एगो 14 बरीस के बेटा विशाल के साथे रहत रहले. दीपक के कतही नोकरी ना लागल रहे. एहसे ऊ अपना परिवार के जीविका खातिर एगो ठिकेदार का लगे मजदुरी करत रहले. दिन भर...

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कुलछनी

– डॉ॰ उमेशजी ओझा नीलम के गोड़ धरती प ना पड़त रहे. खुशी के मारे एने से ओने उछलत कुदत चलत रही. एह घरी के सभ लइकी आ लइका के बड़ी इन्तजार रहेला. नीलमो आखिर उछल कुद काहे ना करस. उनकर बिआह जे ठीक भइल रहे. नीलम के मन में खुशी के...

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