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प्रेम के सुभाव

– रामदेव शुक्ल मीतू हम दूनू जने उहाँ पहुंचि गइल बानी जाँ, जहाँ से लवटले के कवनो राहि नइखे बँचल। अगहीं बढ़े के बा, चाहे एहर बढ़ि चलल जा, चाहे ओहर। बोलऽ कवने ओर चलल जाव? मीता के लिलार चमकि उठल। कहली- ”तहार कहल आ हमार सूनल, ई...

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केकरा पर करबि सिंगार

– रामवृक्ष राय ‘विधुर’ जवार भर में केहू के मजाल ना रहे कि भोला पहलवान का सोझा खड़ा होखे. जब ऊ कवनो बाति पर खिसिया के सनकी हाथी नीयर खड़ा हो जासु त नीमन-नीमन नवहन के साँसि फूले लागे. मीठू ओस्ताद का अखाड़ा में बइठक करे लागसु त...

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वरमाला

– कामता प्रसाद ओझा ‘दिव्य’ अन्हरिया….. घोर अन्हरिया…. भादो के अन्हरिया राति. छपनो कोटि बरखा जइसे सरग में छेद हो गइल होखे. कबहीं कबहीं कड़कड़ा के चमकि जाता त बुझाता जे अबकी पहाड़ के छाती जरूरे दरकि जाई. मातल...

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बाजलि बैरनि रे बाँसुरिया

– गिरिजाशंकर राय ‘गिरिजेश’ पाकिस्तान के मारि के हमार सिपाही ओकर छक्का छोड़ा दिहलन सऽ. चीन क कुल्हि चल्हाँकी भुला गइल. मिठाई खाइब… हो… हो. ईहे हई नगरी, जहाँ बाड़ी बनरी, लइकन क धइ-धइ खींचेली टँगरी. एगो बीड़ी बाबू...

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भैरवी क साज

– ईश्वरचन्द्र सिन्हा सिंहवाहिनी देवी के सालाना सिंगार के समय माई के दरबार में जब चम्पा बाई अलाप लेके भैरवी सुरू कइलिन, त उहाँ बइठल लोगन क हाथ अनजाने में करेजा पै पहुँच गयल. रात भर गाना सुनत-सुनत जे झपकी लेवे सुरू कय देहले...

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