टैग: कहानी

भगवान के चटकन

– डॉ॰ उमेशजी ओझा अरे ए रबिन्दरा, आपन दिमाग ठीक राख, जमीन प रहेके सीख, हवा में मत उड़. सब कोर्इ के इजत होला. जोऽ, आ लईकी देख आउ आ बढिया से आपन बेटा सुरेश के बिआह क दे. ढेरी लईकी देखि के छोड़ छाड़ मत कर, भगवान सब देखत बानी....

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गुलजारी लाल के जूता

– देवेन्द्र कुमार गुलजारी लाल जी आपन संघतिया मनमौजी के संगे साप्ताहिक बाजार मंगला हाट में हफ्ता भर के जरूरी सामान के खरीदारी करे खातिर गइल रहलें. दूनो संघतिया बाजार में घूमत-फिरत आपन जरूरत के मुताबिक सर-सामान खरीदत रहलें....

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वीर विशाल

– डॉ॰ उमेशजी ओझा एगो छोटहन गांव में दीपक अपना धर्मपत्नी सुरभी आ एगो 14 बरीस के बेटा विशाल के साथे रहत रहले. दीपक के कतही नोकरी ना लागल रहे. एहसे ऊ अपना परिवार के जीविका खातिर एगो ठिकेदार का लगे मजदुरी करत रहले. दिन भर...

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कुलछनी

– डॉ॰ उमेशजी ओझा नीलम के गोड़ धरती प ना पड़त रहे. खुशी के मारे एने से ओने उछलत कुदत चलत रही. एह घरी के सभ लइकी आ लइका के बड़ी इन्तजार रहेला. नीलमो आखिर उछल कुद काहे ना करस. उनकर बिआह जे ठीक भइल रहे. नीलम के मन में खुशी के...

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कांच कोइन

– संतोष कुमार ‘इहाँ हमरा से बड़का हीरो कवनो बा का ? हम अभिए चाहीं त निमन निमन जाने के ठीक कर दीं’ – किसुन दारु पी के अपना घर के दुअरा पर पैतरा कइले रहलन. आपन मेहरारू के हांक लगावत कहलें – ‘का...

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