अहजह
– नीमन सिंह बतइब हो हम का करीं….. कइसे करीं कइसे रहीं का खाई का पहिनी ? बतइब हो हम का करीं…. कहवां मूती कहवां हगीं केकरा संगे बात बिचारी बतइब हो हम का करीं….. केहू कहे हई करs केहू कहे हउ करs केहू कहे मउज...
Read More– नीमन सिंह बात १९८० के बरसात के समय के ह. हमरा खेत में धान रोपे खातिर बेड़ार में बिया उखाड़े लागल मजदूर बिया उखाड़त रहले सन. बगल में भिंडा रहे पोखरा के एक तरफ, दोसरा तरफ मुरघटिया रहे. मजदूरन में एगो मजदूर ६ फीट लमहर बाकिर...
Read More– नीमन सिंह एक बेर के बात ह, नारद मुनि कहीं से गुजरत रहनी. ओही रास्ता में उनुका एगो आदमी मिलल, उ आदमी कुछ जियादही भोला–भाला, माने कि कुछ–कुछ मुरख जइसन, सोझबउक रहे, अउर ओहपर से करईला आउर नीम चढ़ल वाली बात रहे कि उ तनी कम...
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