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अब का का देखाई ई बेलनटाइट !

– जयंती पांडेय चौदह फरवरी सामने आ गइल बा. टेलीविजन पर ए घरी अभिये से “वेलेंटाइण डे” के ढेर परचार होखे लागल बा. केहू अपना वेलेंटाइन के हीरा के अँगूठी देबे के राय देता, त केहू सोना के हार, जेवर त केहू स्टाइलिस्ट...

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ई सरकार का हऽ

– जयंती पांडेय रामचेला एह जाड़ में सबेरे-सबेरे बाबा लस्टमानंद के दुअरा पहुँचले. बाबा घूरा तर बइठल रहले. संगे अउरो दू चार गो लोग रहे. बाबा के दंडवत बोल के राम चेला घूरा के लगे एगो पुअरा के बिड़ई पर बइठ गइले. राम निहोरा खइनी...

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हमरा गाँवे आ के देखीं ना सरकार

– जयंती पांडेय जब दुनिया भर में तरक्की के बयार बह रहल बा त बाबा लस्टमानंद के गाँव कइसे अछूता रहि जाई. ओह गाँव के जे सड़क पहिले ईंटा के रहल ह, ना त अलकतरा टूटल टाटल, अब उहाँ सीमिंट के रोड बन गइल बा आ गाँव के लइका दहेज के...

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का हऽ पीएसी अउर जेपीसी के चक्कर

– जयंती पांडेय संसद के आखिरी दिन बाबा लस्टमानंद से रामचेला पूछलें, ई पीएसी आ जेपीसी का हऽ ? केहु नईखे पूछत कि का चाहीं. बस विपक्ष चिल्ला रहल बा कि दूनू चाहीं. आ सरकार के कहल हऽ कि जब एगो बा तऽ दोसरका का होई ? विपक्ष जिदिया...

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सरकारी होखे के फायदा

– जयंती पांडेय सरकारी बीवी, बहू, समधिन, समधी लांग लाइफ काम देला लोग, रिटायर हो गइला के बादो. सरकारी होखला के फायदा रिटायर्ड होखला के बादे बुझाला. सरकारी आदमी के अरदवाय बेसी होला, ढेर दिन ले पेंशन खाला. जेतना वेतन ना पावे,...

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