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वातावरण बनवले राखऽ भाई

– जयंती पांडेय बाबा लस्टमानंद के संघतिया एगो बड़हन अखबार में फोटोग्राफर हवें. बड़ भाई दाखिल हवें. एक दिन देस में भ्रष्टाचार के लेके बड़ा चिंता जाहिर कइलें. कवनो काम नइखे होत. उनकर दुख देखि के बाबा कहलें हे भाई सुनऽ. तहरा...

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बतावऽ तऽ, सबसे बड़हन के

– जयंती पांडेय बड़ा कंफ्यूजन बा जी. आउर ई नेता लोग तऽ मामिला के अउरी फइला रखले बा. जवने घोटाला सामने आवऽता ओही के सबसे बड़हन बता देता लोग. एक बात पर टिकते नइखे लोग. ई जमाना के साथ चले वाला बात ना हऽ. काहे कि जेतना...

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नरक में सस्तई

– जयंती पांडेय एक दिन बाबा लस्टमानंद रात में सुतल रहले. अचानक ऊ सपना देखे लगले कि एगो बड़हन मॉल (नया जमाना के बजार) में दोकान देखते – देखते ऊ नरक के दुआर पर पहुंच गइल बाड़े. उनका आगे एक जना अऊरी रहे, जेकरा के बाबा...

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