उदय शंकर “प्रसाद” के कविता – बखारी, मजबूरी
(1) बखारी बास के चचरा गोल गोल मोडाईल ऊपर से खरई सरिया के बंधाईल माटी के लेप चचरा पे लेपाईल बखारी...
Read More(1) बखारी बास के चचरा गोल गोल मोडाईल ऊपर से खरई सरिया के बंधाईल माटी के लेप चचरा पे लेपाईल बखारी...
Read More(1) नून इक दिन बहुत हाहाकार मचल भात, दाल, तरकारी में। काहे भैया नून रूठल बा बइठक भइल थारी में।...
Read Moreरामजियावन दास बावला देश भयल आजाद मगर रण कै बरबादी पउलस के,सोचऽ आजादी पउलस के ? के के आपन खून...
Read More(एक) फूल के, फर के, टपक-चू के निझा जाए के बा.के रहल, कइसन रहल एहिजे बुझा जाए के बा. फूल के पचकत...
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