घर छूटल देश छूटल भोजपुरी ना छूटल
शरद के मालगाड़ी देखऽ आइल शरद के मालगाड़ी. सन सन करत सीटी बजावत, झंडी लाल पीयर हरियर हिलावत, देखऽ...
Read Moreशरद के मालगाड़ी देखऽ आइल शरद के मालगाड़ी. सन सन करत सीटी बजावत, झंडी लाल पीयर हरियर हिलावत, देखऽ...
Read Moreकनक किशोर के कुछ कविता दू दूनी पांच समय बदलल गाँव के माटी चलल शहर के राहि शहर तीन...
Read Moreउपन्यास-सम्राट प्रेमचंद के इयाद में स्व. कवि विजेन्द्र अनिल के लिखल गीत (रिवरहेड, न्यू यॉर्क, अमेरिका में रहे वाला डॉ कमल किशोर सिंह के सौजन्य से ईमेल से मिलल) [तर्ज-विदेसिया] गोरवन के राज रहे, बिगड़ल समाज रहे। मकरी बीनत रहे...
Read Moreनवोढ़ा – ब्यथा – प्रो.(डॉ.) जयकान्त सिंह ‘जय’ #नवोढ़ा-ब्यथा #भोजपुरी...
Read Moreगाँव-गान : गउँआ के देखि मन चिहाला – – प्रो.(डॉ.) जयकान्त सिंह ‘जय’...
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