चिट्ठी
– डा॰अशोक द्विवेदी हम तोहके कइसे लिखीं? कइसे लिखीं कि बहुते खुश बानी इहाँ हम होके बिलग तोहन लोग से… हर घड़ी छेदत-बीन्हत रहेला इहवों हमके गाँव इयाद परावत रहेला हर घड़ी ओइजा के बेबस छछनत जिन्दगी. कल कहाँ बा बेकल मन के...
Read More– अभय कृष्ण त्रिपाठी पापी हो गइल मनवा कइसे करीं राम भजनवा, प्रभुजी मोरे कइसे करीं राम भजनवा.. आइल बानी द्वार तिहारे, मन ही मन में रजनी पुकारे, पुलकित होवे ला मदनवा, प्रभुजी मोरे कइसे करीं राम भजनवा.. दाता के भंडार भरल बा,...
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