भाजपा के त्रिशूल
- टीम अंजोरिया

भाजपा के त्रिशूल

सभे डेराइल रहल कि कहीं बंगाल में भाजपा आपन धोबी-पछाड़ देखावे खातिर कुछ अइसन-वइसन फैसला मत ले लेव। भगवान के लाख लाख आभार कि भाजपा एहिजा अइसन कवनो गलत दाँव ना चलल जवना के कइ बेर मास्टर स्ट्रोक बता दीहल जाला। एक तरह से कहीं त बंगाल में भाजपा के मास्टर स्ट्रोक इहे रहल कि ऊ कवनो मास्टर स्ट्रोक ना चललसि।

भाजपा में तेज तर्रार नेतन के कवनो कमी नइखे बाकिर कई बेर भाजपा के इन्द्रदेव लोग अइसनका लोगन के उभरे ना देसु। कुछ तेज तर्रार नेता अइसनो रहल बाड़न जे अपने तेज-तर्रारी का चलते डूब गइलें। जइसे कि प्रवीण तोगड़िया आ लालकृष्ण आडवाणी। आ कुछ तेज-तर्रार नेता आपन तेजी के धार अपनहीं कुंद कर देलन कि उनुकर स्वीकार्यता बनि जाव। एकर उदाहरण महाराष्ट्र के फणनवीस के देखल जा सकेला।

अब पश्चिम बंगाल खातिर शुवेन्दु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनावे के निर्णय ले के भाजपा आपन त्रिशूल बना लिहलसि। आ एह त्रिशूल के विशिष्टता बतावे से पहिले अगर भगवान शिव के त्रिशूल के चरचा कर लीहल जाव त ठीके रही।

विष्णु पुराण आ शिव पुराण के कुछ संस्करण से ई जानकारी मिलेला कि भगवान सूर्य के विवाह देवता लोगन के वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा के पुत्री संजना से भइल रहल। संजना सूर्य के उष्मा बरदाश्त ना कर पावत रही त विश्वकर्मा सूर्य के उष्मा के आठवां हिस्सा कम कर के ओह उर्जा के त्रिशूल में बदल दिहलन। आ भगवान शिव के ई त्रिशूल थमा दिहलन। काहें कि उनुके वश में रहल अतना उर्जा के सम्हारे के। बतावल जाला कि त्रिशूल के हर शूल सृजन, संरक्षण, आ विनाश के प्रतिनिधित्व करेला। इहो कह सकीलें कि दिव्य शक्ति, समय, आ उर्जा एह त्रिशूल के तीन गो अंश हवे। अलग बाति बा कि कुछ लोग के इहो मान्यता हवे कि भगवान शिव स्वयंभू रहलन आ ऊ त्रिशूल लिहलहीं प्रकट भइल रहलन।

अब एह कहानी के भाजपा पर डाले के होखे त संघ सूर्य हवे आ ओकर उष्मा हिन्दुत्व हवे। अगर ई सगरी उर्जा एकही जगह रहे त ओकर ताप सरकार बर्दाश्त ना कर पाई। आ तब विश्वकर्मा रुपी मोदी-शाह के युगल जोड़ी ओह तेज के कुछ हिस्सा कम कर के एगो त्रिशूल बना दिहलन। योगी आदित्यनाथ, हिमन्त बिस्व सरमा, आ शुवेन्दु अधिकारी का रुप में। ई तीनो अनियन्त्रित उर्जा का तरह हउवें जे बिना लाग-लपेट हिन्दुत्व के बात करेलें आ ओकर शक्ति स्थापित करे में लागल बाड़ें। ई लोग बिना हिचकिचाहट, बिना एने-ओने कइले खुलेआम हिन्दूत्व के संरक्षण आ विस्तार करे में लागल रहेलें।

आ सबले खास बात इहो बा कि ई तीनो लोग भाजपा के समुद्र से नइखे निकलल। वइसे योगी आ शुवेन्दु का बारे में मानल जाला कि अपना शुरुआती जीवन में ई लोग संघ से जुड़ल रहल बा। योगी हिन्दु युवा वाहिनी से भाजपा में अइलें, हिमन्ता कांग्रेस से, आ शुवेन्दु तृणमूल से। बाकिर ई तीनो अतना समर्पित संघी का तरह काम करेलें जतना बहुते संघीओ ना कर पावसु।

बधाई शुवेन्दु के आ आभार मोदी-शाह के कि बंगाल में कवनो मास्टर स्ट्रोक चलावे के गलती ना कइलन।

 

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