महीना: अक्टूबर 2010

पत्रकारिता : काल्हु से आजु ले

– आर्य सम्पूर्णानन्द हम लगभग बीस बरिस से पत्रकारिता के अनुभव देखत बानी. तब से अब ले पत्रकारिता में जमीन आसमान के अन्तर आ गइल बा. तब त खादी के कुरता अउरी बगल में गाँधी झोला, इहे असली पत्रकारिता के पहचान रहे. आजु जींस अउरी...

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मऊ के साँच रामलीला

– आर्य सम्पूर्णानन्द शारदीय नवरात्र शुरु होखते जगहे-जगह रामलीला के मंचन शुरु हो जाले अउर दशमी के रावण के मार के दशहरा खूवे धूम धाम से मनावल जाला बाकिर आईं रउआ सभे के मऊ के साँच अउर अलौकिक रामलीला के दर्शन करायीं आ रामजी के...

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गाँवे गइनी गाँव से भगनी

– पाण्डेय हरिराम अक्टूबर का शुरु में गाँव गइल रहीं. सिवान जिला के पचलखी पंचायत के खुदरा गाँव. बड़ बूढ़ बतावेलें कि कबही एकर नाम खुदराज माने सेल्फ गवर्न्ड रहे. अठारहवीं सदी का बादवाला अधिया में गाँव में पंचायती व्यवस्था...

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सिमी और संघ के एक बरोबर मानल

– पाण्डेय हरिराम बुधवार (छह अक्टूबर) का दिने राहुल गांधी, पी एम इन मेकिंग, कह दिहले कि कट्टरवाद का मामिला में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) आ स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑव इंडिया (सिमी) में कवनो अंतर नइखे. हालांकि जइसन...

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देवी गीत

– रामरक्षा मिश्र विमल तहरा दरश के जुटी कब सुजनिया, देवी हो मइया ना बानी तहरे शरनिया, देवी हो मइया ना. लछिमी के रूप बरिसावेला धनवा दुखियो के खूब अगरावेला मनवा हमनी के दुख के मिटी कब कहनिया, देवी हो मइया ना खुशहाल जिंदगनिया,...

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