महीना: मई 2011

कहाँ गइल उ दिन

– जयंती पांडेय घर के बूढ़ पुरनिया कहेलन कि सब दिन होत न एक समाना. तुलसिओ बाबा एतना बड़ रामचरितमानस लिख के समुझवले बाड़न, “होइहें वही जो राम रचि राखा, को करि तरक बढ़ावहीं शाखा.” सचहूँ, समय बहुते बलवान होला. एकर...

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डा॰ किहाँ जाये से पहिले तइयारी कर लीं

ममता सिंह हालही में दि इण्डियन जर्नल फॉर कम्युनिटी मेडिसिन में एगो लेख पढ़े के मिलल जवना में दवा लिखे के आ डाक्टरी विचार विमर्श का बारे में शोध का दिशाईं एगो व्यापक अध्ययन का बाद पावल गइल कि “डाक्टरी परामर्श खातिर औसतन सात...

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माई बाप अउर सुख दुख

– पाण्डेय हरिराम जिनगी माई के अँचरा के गाँठ जइसन होले. गाँठ खुलत जाले. कवनो में से दुख त कवनो में से सुख निकल आवेला. हमनी का अपना दुख में भा सुख में भुलाइल रहीले. ना त माई के अँचरा याद रहेला ना ओह गाँठ के खोल के माई के...

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बतकुच्चन – १०

आजु पता ना काहे मन अँउजाइल बा. लागत बा कि कंठ में कुछ अटकल बा अँउजार जइसन. आ कंठ का भीतर कुछ अटकल होखे त जान पर आफत बनि जाला कबो-कबो. अलगा बाति बा कि कंठ का बाहर लटकल कंठहार औरतन के सुंदरता बढ़ा देला. कंठ गवनई के सुरो के कहल...

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