भोजपुरी के कहाँ ले जात बा महुआ ?
– प्रभाकर पाण्डेय “गोपालपुरिया” रमेसर काका हँसुआ उठवले भिनसहरे गोहूँ काटे जात रहुअन. ओही बेरा हमहुँ महुआ बीने खातिर दउरी अउर डलिया उठवले निकलल रहुवीं. रमेसर काका के देखते हमरी मुहें से निकलि गउवे, “पाँव लागी काका, चउरी के...
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