महीना: जनवरी 2012

चिहुँकला के जरुरत नइखे

अँजोरिया के ई रूप जानबूझ के कइल गइल बा कि पहिला पन्ना जल्दी खुल जाव आ ओकरा बाद जब रउरा कवनो सामग्री के विस्तार पढ़े के चाहीं तबहिये विज्ञापन वगैरह सामग्री सामने आवे. ई सुधार कइसन लागल कमेंट लिखल मत भूलाईं. जानल चाहत बानी कि रउरा...

Read More

गज़ल

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 5वी प्रस्तुति ) – ‍शशि प्रेमदेव गाँधी जी के बानर, बनि गइले पर नीक कहाइबि हम। साँच बात कहि के ए दादा, माथा ना फोरवाइबि हम। मन के कहना मान लेबि तऽ कबहूँ ना पछताइबि हम। बेसी चतुर...

Read More

प्रान बसे ससुररिया रे !

पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 4थी प्रस्तुति – ‍हीरालाल ‘हीरा’ अकसर एके संगे खइले सँगे मदरसा पढ़हू गइले एक्के अँगना खेलत-कूदत दिन-दिन बढ़ल उमिरिया रे। दू भई का नेह क चरचा सगरो गाँव नगरिया रे । भव भरल भटकाव न...

Read More

टटका खबर (शुक, 20 जनवरी 2012)

आजु के फोटो (20 जनवरी का दिने विधान परिषद के सौ साल पूरा होखला के उपलक्ष में पटना कॉलेज के सेमिनार हॉल में एगो खास संगोष्ठी करावल गइल. ) बिहार के खबर विधान परिषद के सौ साल पूरा होखला के उपलक्ष में पटना कॉलेज के सेमिनार हॉल में...

Read More

पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 3

सामयिकी आधी आबादी के बदलत चेहरा – ‍आस्था जिनिगी में, हार, असफलता आ पीछे छूटि गइल आम बात हऽ. सपना पूरा ना भइल त एकर मतलब ई ना हऽ कि सपना देखले छोड़ दिहल जाव. उमेद मुए के ना चाहीं. उमीद आ सपना जिया के राखल आ ओके पूरा करे...

Read More

Recent Posts

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..