भिच्छा
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 15वी प्रस्तुति) – आशारानी लाल जब ना तब हमके बइठल देख के ऊ हमरा सोझा धमक जाले. दूर से चलल-चलल आवेले एही से थाकलो लउकेले. ओकरा तनिको अहस ना होला. इहो ना सोचेले, कि बड़ लोगिन के...
Read MorePosted by Editor | फरवरी 7, 2012 | कहानी, पुस्तक चर्चा, साहित्य |
(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 15वी प्रस्तुति) – आशारानी लाल जब ना तब हमके बइठल देख के ऊ हमरा सोझा धमक जाले. दूर से चलल-चलल आवेले एही से थाकलो लउकेले. ओकरा तनिको अहस ना होला. इहो ना सोचेले, कि बड़ लोगिन के...
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(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 14वी प्रस्तुति) – राजगुप्त (एक) पान खइनी, गुटका-गुटकी ट्रेन अपना रफ्तार से दउड़त रहे. गर्मी के दिन ऊपर से बहुते भीड़ि रहे. सज्जी पसिन्जर गर्मी से बेहाल रहले. एही बीचे एगो चना...
Read Moreबहुत दिन पहिले एगो कहानी सुनले रहीं. एगो नेताजी मंच से भाषण देत रहलें. कहत रहलें कि ऊ देश के हालात से बहुते चिन्तित रहेलें काहें कि गाँधी जी मर गइले, नेहरू जी मर गइलें आ हमरो तबियत खराबे चलत...
Read Moreसुशासन आ विकास के अनेके महत्वपूर्ण कसौटी पर कसला का बाद द संडे इंडीयन अबैकस मार्केट रिसर्च के कहना बा कि एनडीए शासित राज्य कांग्रेस शासित राज्यन से बढ़िया प्रदर्शन कइले बाड़ी स. देश के सगरी प्रमुख राज्यन के सूरते हाल जाने ला भइल...
Read Moreमहज चौदह साल का उमिर में अपना जमाना के मशहूर गायिका बिजली रानी से गीत गवावल अपना आप में बहुते खास होला आ ई कमाल कर देखवले संतोष पुरी. तब ऊ संतोष गिरी का नाम से गीत लिखल करसु बाकिर लोकप्रियता मिलल उनुका लिखल हिट गीत ‘ आइले मोरे...
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